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High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फिजियोथेरेपी डिग्री को एमबीबीएस के समकक्ष मानने से किया इन्कार

Wed, 09 Jul 2025 07:08 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 09 Jul 2025 07:08 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी की भर्ती से संबंधित एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें फिजियोथेरेपी की डिग्री को बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) के समकक्ष मानने की मांग की गई थी।

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High Court: Allahabad High Court refuses to accept physiotherapy degree as equivalent to MBBS
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खाद्य सुरक्षा अधिकारी की भर्ती से संबंधित एक याचिका खारिज कर दी, जिसमें फिजियोथेरेपी की डिग्री को बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी (एमबीबीएस) के समकक्ष मानने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति अजीत कुमार की पीठ ने कहा, यह निर्धारित करना अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर है कि फिजियोथेरेपी की डिग्री एमबीबीएस के बराबर है या नहीं।

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यह फैसला राज्य सरकार या भारतीय चिकित्सा परिषद को लेना है कि वे फिजियोथेरेपी को चिकित्सा पाठ्यक्रम के रूप में मान्यता दें या नहीं। जब तक सरकार या नियुक्ति प्राधिकरण ऐसी डिग्री को सेवा नियमों के तहत आवश्यक योग्यता के रूप में स्वीकार नहीं करता, तब तक अदालत उन्हें निर्देश नहीं दे सकती।

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प्रयागराज की संध्या यादव ने 2014 में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद के लिए उप्र लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद साक्षात्कार में उपस्थित होने से मना कर दिया गया कि उनके पास चिकित्सा में स्नातक की डिग्री नहीं थी। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि उनकी फिजियोथेरेपी की डिग्री इंटीग्रल यूनिवर्सिटी, लखनऊ की ओर से प्रदान की गई थी, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की ओर से मान्यता प्राप्त है।

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हालांकि, प्रतिवादी ने दलील दी कि चिकित्सा में डिग्री का अर्थ भारतीय चिकित्सा परिषद अधिनियम-1956 के तहत मान्यता प्राप्त डिग्री है और केवल एमबीबीएस की डिग्री ही इस अधिनियम के तहत मान्यता प्राप्त है। फिजियोथेरेपी को एमसीआई की ओर चिकित्सा विज्ञान के विषय में मान्यता प्राप्त नहीं है। इसलिए याचिकाकर्ता की योग्यता को सेवा भर्ती नियमों, 2012 के तहत अपेक्षित योग्यता नहीं माना जा सकता है। 

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