UP : हाईकोर्ट ने जनप्रतिनिधियों पर दर्ज 28 छोटे आपराधिक मामले वापस लेने की अनुमति दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज 28 आपराधिक मामलों को वापस लेने के राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनप्रतिनिधियों के खिलाफ दर्ज 28 आपराधिक मामलों को वापस लेने के राज्य सरकार के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने यह आदेश एमपी/एमएलए विशेष कोर्ट से संबंधित एक स्वतः संज्ञान याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
कोर्ट ने जिन 28 मामलों को वापस लेने की अनुमति दी है, वे सभी छोटे अपराध की श्रेणी में आते हैं। इनमें मुख्य रूप से कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान आपदा प्रबंधन अधिनियम के उल्लंघन, सार्वजनिक चुनावों के दौरान आचार संहिता के उल्लंघन और सरकारी अधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा से जुड़े हैं।
राज्य सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि सरकार ने आम नागरिकों के खिलाफ आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत दर्ज सभी मामलों को वापस लेने का नीतिगत निर्णय लिया है। ऐसे में कोर्ट ने माना कि केवल जनप्रतिनिधि होने के कारण इन मामलों को लंबित रखना उचित नहीं है।
कोर्ट ने कहा, लोक अभियोजक इन मामलों को वापस लेने के लिए संबंधित ट्रायल कोर्ट में आवेदन करेंगे। ट्रायल कोर्ट कानून के अनुसार और मामले की योग्यता के आधार पर अपना स्वतंत्र निर्णय लेंगे। गंभीर अपराधों से संबंधित अन्य आवेदनों पर कोर्ट 26 फरवरी को सुनवाई करेगा।
इनको मिली राहत
उमा भारती (महोबा), डॉ.संजीव बालियान (मुजफ्फरनगर), सुरेश राणा, ठाकुर जयवीर सिंह (अलीगढ़), नीलम सोनकर (आजमगढ़), अनिल सिंह (उन्नाव), अशरफ अली खान (शामली), सीमा द्विवेदी (जौनपुर), अभिजीत सांगा (कानपुर नगर), विजेंद्र सिंह (बुलंदशहर), विवेकानंद पांडेय (कुशीनगर), मीनाक्षी सिंह (बुलंदशहर), जय मंगल कनौजिया (महराजगंज), राजपाल बालियान (मुजफ्फरनगर), प्रदीप चौधरी (हाथरस), प्रसन्न चौधरी शामली, उमेश मलिक, सुरेश राना, कुमार भारतेंदु, वेदप्रकाश गुप्ता।
