High Court : कोर्ट ने किशोर को दी जमानत, कहा-अपराध की गंभीरता जमानत रोकने का आधार नहीं
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा-12 का हवाला दिया। कहा कि अपराध की गंभीरता नहीं, केवल तीन ही परिस्थितियों में किशोर को जमानत देने से इन्कार किया जा सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की धारा-12 का हवाला दिया। कहा कि अपराध की गंभीरता नहीं, केवल तीन ही परिस्थितियों में किशोर को जमानत देने से इन्कार किया जा सकता है। पहली, रिहाई से उसके किसी ज्ञात अपराधी के संपर्क में आने की आशंका हो। दूसरी, रिहाई से उसे नैतिक, शारीरिक या मनोवैज्ञानिक खतरे में पड़ने की संभावना हो। तीसरी, उसकी रिहाई से न्याय के उद्देश्य विफल होते हों।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने ट्रायल कोर्ट के आदेशों को त्रुटिपूर्ण और कानून के स्थापित सिद्धांतों के विपरीत मानते हुए रद्द कर किशोर को सशर्त जमानत पर रिहा करने का आदेश जारी किया है। फिरोजाबाद के नगला सिंघी थाने में किशोर के खिलाफ गंभीर मामले में एफआईआर दर्ज है। जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड और विशेष अदालत पॉक्सो एक्ट ने किशोर की जमानत और अपील याचिकाएं खारिज कर दी थीं। इन फैसलों के खिलाफ हाईकोर्ट में आपराधिक पुनरीक्षण याचिका दायर की गई थी।
मामले में कोर्ट ने पाया कि जिला प्रोबेशन अधिकारी (डीपीओ) की रिपोर्ट में तीनों में से कोई ठोस आपत्ति नहीं जताई गई थी। ऐसे में कोर्ट ने लंबे समय से बाल सुधार गृह निरुद्ध होने और जल्द ट्रायल पूरा न होने को देखते हुए सशर्त जमानत दे दी।