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High Court : मृत बिजलीकर्मी के परिजनों को मुआवजा न देने पर हाईकोर्ट नाराज, पीवीवीएनएल के प्रबंध निदेशक तलब
Fri, 10 Jul 2026 05:44 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 10 Jul 2026 05:44 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉल्ट ठीक करते समय करंट से मरने वाले श्रमिक के परिजनों को मुआवजा न देने पर नाराजगी जताई है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से तलब कर कहा कि निगम ने मामले को लापरवाही और असंवेदनशील तरीके से लिया है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने फॉल्ट ठीक करते समय करंट से मरने वाले श्रमिक के परिजनों को मुआवजा न देने पर नाराजगी जताई है। पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से तलब कर कहा कि निगम ने मामले को लापरवाही और असंवेदनशील तरीके से लिया है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने फूलचंद्र की याचिका पर दिया। शिव कुमार गुप्ता खंभे पर चढ़कर फॉल्ट ठीक कर रहे थे। इसी दौरान करंट लगने से उनकी मौत हो गई। वाराणसी के उप निदेशक (विद्युत सुरक्षा) की जांच रिपोर्ट में कहा गया कि उन्होंने जूनियर इंजीनियर के निर्देश पर बिना शटडाउन लिए खंभे पर चढ़े थे।
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दुर्घटना बिजली नियम-1956 के नियम 36(2) का पालन न होने के कारण हुई। उन्होंने आश्रितों को उचित मुआवजा देने की संस्तुति की तो निगम ने इन्कार कर दिया। कहा कि शिव कुमार उनके कर्मचारी नहीं थे। कोर्ट में मामला आने पर अधिवक्ता ने 7.50 लाख रुपये मुआवजा देने की बात कही, लेकिन बाद में निगम अपने बयान से पीछे हट गया।
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निगम तकनीकी आधारों पर मुआवजे का विरोध करने लगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि जब विद्युत सुरक्षा अधिकारी की रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से दर्ज है कि मृतक निगम के कर्मचारी के निर्देश पर कार्य कर रहा था, तब ऐसे तथ्यों को तकनीकी दलीलों के आधार पर नकारना स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोर्ट ने नाराजगी जताई कि निगम के अधिवक्ता ने कहा कि अदालत निगम से बंदूक की नोक पर आदेश का पालन कराना चाहती है। पीठ ने इसे एक अधिवक्ता जैसे न्यायालय के अधिकारी के लिए अनुचित टिप्पणी बताई। 13 जुलाई को मामले की सुनवाई होगी।