सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court fine of 25 thousand rupees was imposed on a baseless petition

High Court : निराधार याचिका पर 25 हजार रुपये का लगाया जुर्माना, हाईकोर्ट ने की तल्ख टिप्पणी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 15 Mar 2026 04:14 PM IST
विज्ञापन
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) से जुड़े मामले में दाखिल निराधार याचिका को खारिज कर याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।

High Court fine of 25 thousand rupees was imposed on a baseless petition
अदालत का फैसला। - फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एलयूसीसी (लोनी अर्बन मल्टी स्टेट क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट कोऑपरेटिव सोसायटी) से जुड़े मामले में दाखिल निराधार याचिका को खारिज कर याचिकाकर्ता पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह आदेश न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकल पीठ ने शैल्ली बजाज उर्फ शैलजा तिवारी की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

Trending Videos


एलयूसीसी एक बहु-राज्य सहकारी संस्था है, जिस पर निवेश के नाम पर धन जमा कराने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से जुड़े कई मामले विभिन्न जिलों में लंबित हैं। ललितपुर की अदालत में भी एक मामला विचाराधीन है।
विज्ञापन
विज्ञापन


इस प्रकरण में शैल्ली बजाज उर्फ शैलजा तिवारी ने अनुच्छेद-227 के तहत याचिका दाखिल कर हाईकोर्ट से अनुरोध किया था कि ललितपुर के मजिस्ट्रेट को निर्देश दिया जाए कि वे इस संबंध में दर्ज मुकदमे की प्रार्थना पत्र पर शीघ्र विचार कर तर्कसंगत आदेश पारित करें।

कोर्ट ने कहा कि याची मूलरूप से हाईकोर्ट की एक समन्वय पीठ की ओर से पूर्व में पारित आदेश को लागू कराने के लिए इस अदालत से निर्देश मांग रहा है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-227 के तहत दायर याचिका में हाईकोर्ट स्वयं किसी अन्य पीठ के आदेश को लागू कराने वाली अदालत की भूमिका नहीं निभा सकता। 

अवमानना अर्जी के खिलाफ स्पेशल अपील पोषणीय नहीं: कोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अवमानना अर्जी के खिलाफ सामान्य परिस्थितियों में स्पेशल अपील पोषणीय नहीं है। इसके खिलाफ अपील तभी दाखिल की जा सकती है, जब अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर मूल विवाद के गुण-दोष पर कोई फैसला सुनाया हो। या फिर किसी को अवमानना के लिए दंडित किया गया हो। इस टिप्पणी के साथ मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने सोनभद्र निवासी अर्जुन उर्फ अर्जुन लाल प्रजापति की स्पेशल अपील खारिज कर। याची ने एकल पीठ के 19 जनवरी 2026 के उस आदेश को खंडपीठ में चुनौती दी थी, जिसमें उसकी अवमानना अर्जी को भ्रामक मानकर खारिज कर दिया गया था। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि एकल पीठ ने अवमानना अर्जी में उठाए गए बिंदुओं पर विस्तार से विचार नहीं किया। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed