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UP : पीडब्ल्यूडी के जूनियर इंजीनियरों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत, 2001 से नियमित मान पुरानी पेंशन देने का आदेश
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 23 Feb 2026 05:16 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यरत जूनियर इंजीनियरों की विशेष अपील स्वीकार कर ली। कहा, समान परिस्थितियों में लखनऊ पीठ की ओर से पारित आदेश का लाभ इन्हें भी मिलना चाहिए।
कोर्ट का आदेश।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) में कार्यरत जूनियर इंजीनियरों की विशेष अपील स्वीकार कर ली। कहा, समान परिस्थितियों में लखनऊ पीठ की ओर से पारित आदेश का लाभ इन्हें भी मिलना चाहिए। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह, न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने राकेश कुमार त्रिपाठी समेत आठ की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
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सात जूनियर इंजीनियर (सिविल) और एक जूनियर इंजीनियर (मैकेनिकल) की 1986 से 1989 के बीच दैनिक वेतन पर नियुक्ति की गई थी। कोर्ट के पूर्व आदेशों के बाद 2006-07 में अलग-अलग तिथियों पर इन्हें नियमित किया गया। याचियों की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि 2001 में नियम संशोधन के बाद वे उसी समय नियमित माने जाने के हकदार थे। यदि उन्हें 20 दिसंबर 2001 से नियमित माना जाए तो उत्तर प्रदेश रिटायरमेंट बेनिफिट्स नियमावली-1961 के तहत पुरानी पेंशन योजना में आएंगे।
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इसी तरह के मामले में लखनऊ पीठ ने 2024 में फैसला देते हुए कर्मचारियों की नियमितीकरण तिथि 20 दिसंबर 2001 से मानने का आदेश दिया था। सभी सेवा व सेवानिवृत्ति लाभ देने के लिए भी कहा था। लखनऊ पीठ के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई थी, जो खारिज हो गई थी।
इस पर शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि इनकी सेवा में नियुक्ति एक अप्रैल 2005 के बाद मानी जाएगी। इसलिए इन्हें नई पेंशन योजना के तहत रखा गया। पुरानी पेंशन व जीपीएफ का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि जब समान परिस्थितियों में लखनऊ पीठ का निर्णय प्रभावी है। सुप्रीम कोर्ट ने उसमें हस्तक्षेप नहीं किया तो वर्तमान अपील का भी वही परिणाम होना चाहिए। कोर्ट ने विशेष अपील स्वीकार कर अपीलकर्ताओं को 20 दिसंबर 2001 से नियमित मानने और उसी आधार पर समस्त सेवा व पेंशन संबंधी लाभ देने का निर्देश दिया है।
