फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court grants relief to AMU PhD student; stays arrest in case.

High Court : हाईकोर्ट ने एएमयू के पीएचडी छात्र को दी राहत, दुष्कर्म के मुकदमे में गिरफ्तारी पर लगाई अंतरिम रोक

Fri, 07 Aug 2026 09:10 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 07 Aug 2026 09:10 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक पीएचडी छात्र अब्दुर रहीम को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है।

विज्ञापन
High Court grants relief to AMU PhD student; stays arrest in case.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) के एक पीएचडी छात्र अब्दुर रहीम को राहत देते हुए उसके खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मुकदमे में गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र समंत की खंडपीठ ने मामले को विचारणीय मानते हुए राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई या पुलिस रिपोर्ट दाखिल होने तक, जो भी पहले हो, याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर रोक रहेगी।

विज्ञापन


याची के खिलाफ अलीगढ़ के सिविल लाइन थाने में शादी का वादा कर दुष्कर्म करने के आरोप में एक एएमयू छात्रा ने प्राथमिकी दर्ज कराई है। याची ने इस मामले में गिरफ्तारी पर रोक लगाने व दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की गुहार लगाते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुख्तार आलम ने दलील दी कि याचिकाकर्ता और शिकायतकर्ता एक-दूसरे को पहले से जानते थे तथा दोनों के बीच सहमति से संबंध थे। याचिकाकर्ता ने कभी भी शिकायतकर्ता से विवाह का वादा नहीं किया। बाद में दोनों के संबंध समाप्त हो गए और याचिकाकर्ता ने दूसरी महिला से विवाह कर लिया। इसके बाद दर्ज कराई गई एफआईआर संबंध बिगड़ने का परिणाम है। इसका उद्देश्य याचिकाकर्ता को ब्लैकमेल करना और उसके वैवाहिक जीवन को प्रभावित करना है।
विज्ञापन


वरिष्ठ अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सलीब उर्फ शालू उर्फ सलीम बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के निर्णय का हवाला देते हुए कहा कि यदि किसी एफआईआर के पीछे दुर्भावना या निजी प्रतिशोध की आशंका हो तो अदालत को केवल एफआईआर की भाषा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि पूरे घटनाक्रम और परिस्थितियों का भी सावधानीपूर्वक परीक्षण करना चाहिए। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि मामला विचारणीय है। इसलिए प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश दिया गया।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed