{"_id":"6a09aba55eefd3eaaa0f7dcc","slug":"high-court-it-is-the-right-of-the-accused-to-call-witnesses-to-prove-their-innocence-2026-05-17","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"High Court: बेगुनाही साबित करने के लिए गवाह बुलाना आरोपी का हक, गवाह को बुलाने की मांग खारिज करने का आदेश रद्द","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
High Court: बेगुनाही साबित करने के लिए गवाह बुलाना आरोपी का हक, गवाह को बुलाने की मांग खारिज करने का आदेश रद्द
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 17 May 2026 05:21 PM IST
विज्ञापन
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को बेगुनाही साबित करने का पूरा हक है। इसके लिए किसी गवाह को बुलाने की उसकी मांग तब तक खारिज नहीं की जा सकती, जब तक यह सिद्ध न हो जाए कि अर्जी मुकदमे को लटकाने के लिए दी गई है।
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी को बेगुनाही साबित करने का पूरा हक है। इसके लिए किसी गवाह को बुलाने की उसकी मांग तब तक खारिज नहीं की जा सकती, जब तक यह सिद्ध न हो जाए कि अर्जी मुकदमे को लटकाने के लिए दी गई है। इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने हत्यारोपी इंद्रपाल सिंह की याचिका स्वीकार कर ली। साथ ही उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट ने आरोपी की ओर से पासपोर्ट अधिकारियों को बतौर गवाह तलब करने की अर्जी खारिज कर दी गई थी।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मृत्युदंड जैसे गंभीर मामले में आरोपी को बेगुनाही साबित करने के लिए गवाह बुलाने का कानूनी हक है। अदालत इससे इन्कार नहीं कर सकती। कोर्ट ने याची को 15 दिन में संबंधित अधिकारियों को बतौर गवाह बुलाने के लिए नई अर्जी दाखिल करने की अनुमति दी है। साथ ही ट्रायल कोर्ट को अर्जी पर जल्द आदेश पारित करने का आदेश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मामला रामपुर के स्वार थाना क्षेत्र का है। 26 जुलाई 2016 की रात हुई हत्या के मामले में अगले दिन याची इंद्रपाल को नामजद किया गया था। हालांकि, याची ने दावा किया कि वारदात के वक्त भारत में ही नहीं था। वह 26 जुलाई को फ्लाइट से बैंकॉक (थाईलैंड) चला गया था और 30 जुलाई को लौटा था। अपने इस दावे को साबित करने के लिए उसने पासपोर्ट पर लगी बैंकॉक आगमन की मोहर और थाईलैंड में की गई खरीदारी की रसीदें भी पेश कीं।
इसके बाद सफाई साक्ष्य के बयान दर्ज होने के बाद उसने पासपोर्ट कार्यालय देहरादून और ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के सक्षम अधिकारी को बतौर रक्षा गवाह तलब करने की अर्जी दी। दलील दी कि पासपोर्ट पर लगी रवानगी और आगमन की मोहरों की प्रामाणिकता साबित करने के लिए इन आधिकारिक अभिलेखों और अधिकारियों की गवाही अत्यंत आवश्यक है। हालांकि, रामपुर की सत्र अदालत ने दो जून 2025 को इस अर्जी को यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि इससे मुकदमे में देरी होगी। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।