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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Land purchased in an auction will also remain subject to the court's verdict; a petitioner from Bu

High Court : नीलामी में खरीदी जमीन भी कोर्ट के फैसले से बंधी रहेगी, बुलंदशहर निवासी याची ने दायर की थी अपील

Fri, 14 Aug 2026 09:05 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 14 Aug 2026 09:05 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति को लेकर मुकदमा अदालत में लंबित है तो उस जमीन को न्यायिक नीलामी में खरीदने वाला व्यक्ति भी मुकदमे के अंतिम फैसले से बंधा रहेगा।

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High Court: Land purchased in an auction will also remain subject to the court's verdict; a petitioner from Bu
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी संपत्ति को लेकर मुकदमा अदालत में लंबित है तो उस जमीन को न्यायिक नीलामी में खरीदने वाला व्यक्ति भी मुकदमे के अंतिम फैसले से बंधा रहेगा। यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार की एकलपीठ ने चाज्जू राम की अपील खारिज करते हुए दिया।

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मामला बुलंदशहर जिले की करीब चार बीघा कृषि भूमि से जुड़ा हुआ है। मामले से जुड़े बाबू सिंह का कहना था कि जमीन के मालिक नवाब सिंह ने अप्रैल 1972 को 7,500 रुपये में जमीन बेचने का समझौता किया था। 3,500 रुपये बयाने के रूप में लिए थे। बिक्री विलेख नहीं होने पर बाबू सिंह ने अक्तूबर 1973 को समझौता पूरा कराने के लिए अदालत में मुकदमा दाखिल कर दिया।
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इसी बीच चाज्जू राम ने नवाब सिंह के खिलाफ 10 हजार रुपये की कथित वसूली का मुकदमा दायर किया और जमीन कुर्क करा ली। अप्रैल 1974 को अदालत की नीलामी में चाज्जू राम ने वही जमीन 12,250 रुपये में खरीद ली। वहीं बाबू सिंह की ओर से दायर मुकदमे में उनके पक्ष में जमीन का समझौता पूरा कराने का आदेश ट्रायल कोर्ट ने दे दिया। इस फैसले को चाज्जू राम ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
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हाईकोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि जब जमीन की नीलामी हुई, मुकदमा पहले से अदालत में लंबित था। ऐसे में नीलामी में जमीन खरीदने के बावजूद चाज्जू राम उस मुकदमे के अंतिम परिणाम से अलग नहीं हो सकते। कोर्ट ने कहा कि खरीदार को मुकदमे की जानकारी थी या नहीं, इससे इस सिद्धांत पर कोई असर नहीं पड़ता। इसी के साथ कोर्ट ने दूसरी अपील खारिज कर दी।

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