Prayagraj :अधिवक्ताओं के 10वीं व 12वीं के अंक प्रमाणपत्र भी निकले फर्जी, 99 पर दर्ज हो चुकी है एफआईआर
UP Bar Council : फर्जी डिग्री के सहारे वकालत का खेल अब पुलिस की कार्रवाई के घेरे में है। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र लगाकर पंजीकरण कराने वाले अधिवक्ताओं के खिलाफ सिविल लाइंस पुलिस का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। इसी क्रम में एक और अधिवक्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ फर्जी डिग्री से वकालत करने के मामलों की संख्या बढ़कर 99 पहुंच गई है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
फर्जी शैक्षिक प्रमाणपत्र के आधार पर बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण कराकर वकालत करने के आरोप में सिविल लाइंस पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। फर्जी डिग्री से वकालत करने के आरोप में दर्ज प्राथमिकी की संख्या बढ़कर 99 हो गई है। बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के सचिव की ओर से सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि अल्लापुर के रहने वाले एक अधिवक्ता ने 1991 की एलएलबी की डिग्री के अंकपत्र को सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस (सीओपी) आवेदन पत्र के साथ लगाया था।
सत्यापन के लिए अंकपत्र इलाहाबाद विश्वविद्यालय भेजा गया। विवि की ओर से जांच के बाद अंकपत्र की छायाप्रति को गलत और असत्य बताया गया। बार कौंसिल ने बताया कि संबंधित अधिवक्ता को सत्यापन समिति के संयोजक की ओर से 15 जनवरी 2025 को नोटिस भी भेजा गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मो.कफील बनाम स्टेट ऑफ यूपी व अन्य मामले में पारित आदेश में बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकृत ऐसे अधिवक्ताओं के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराने का निर्देश दिया था, जिनकी शैक्षिक डिग्री बार कौंसिल ऑफ इंडिया के सर्टिफिकेट एंड प्लेस ऑफ प्रैक्टिस (वेरिफिकेशन) नियम, 2015 के तहत सत्यापन में फर्जी मिली है।
इसी आदेश के बाद सिविल लाइंस पुलिस की ओर से बार कौंसिल से प्राप्त शिकायतों के आधार पर लगातार एफआईआर दर्ज की जा रही है। जांच में पता चला कि अधिवक्ता प्रयागराज के अलावा, वाराणसी, कानपुर, लखनऊ, गाजियाबाद, मथुरा, लखीमपुर खीरी, फतेहपुर समेत अन्य शहरों के रहने वाले हैं। सिविल लाइंस थाना प्रभारी रामाश्रय यादव ने बताया कि बार कौंसिल की ओर से उपलब्ध कराए जा रहे रिकॉर्ड और सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। दस्तावेज की जांच में जिन अधिवक्ताओं की शैक्षिक डिग्री या अंकपत्र फर्जी पाए गए हैं, उनके खिलाफ नियमानुसार प्राथमिकी दर्ज की जा रही है।
30 से ज्यादा कॉलेजों व विश्वविद्यालयों से फिर होगा सत्यापन
30 से ज्यादा कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों से डिग्री और अंकपत्रों का सत्यापन कराया जा सकता है। सत्यापन में यह देखा जाएगा कि संबंधित अधिवक्ताओं के नाम से वास्तव में उस संस्थान में दाखिला हुआ था या नहीं। मामले में 100 से अधिक अधिवक्ताओं पर एफआईआर होने की संभावना है।
संगठित गिरोह की सामने आ सकती है भूमिका
जांच में सामने आया है कि कुछ अधिवक्ताओं ने बार कौंसिल में पंजीकरण और सीओपी के लिए जो शैक्षिक दस्तावेज लगाए, उनमें सिर्फ स्नातक स्तर की डिग्री ही संदिग्ध नहीं मिली, बल्कि 10वीं और 12वीं के प्रमाणपत्र और अंकपत्र को लेकर भी सवाल उठे हैं। संबंधित दस्तावेज का सत्यापन कराने पर रिकॉर्ड में उनका मिलान नहीं हो सका। बार कौंसिल अब यह भी पता लगाने में जुटी है कि अधिवक्ताओं ने अलग-अलग स्तर की फर्जी शैक्षिक डिग्रियां और अंकपत्र कहां से हासिल किए। इसमें किसी संगठित गिरोह की भूमिका सामने आ सकती है।