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High Court : 1984 के सिख विरोधी दंगों के आरोपियों की याचिकाएं खारिज, कार्रवाई रद्द करने की लगाई थी गुहार
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:56 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े सात विभिन्न मामलों में आरोपियों की ओर से दर्ज मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में याचिकाएं खारिज कर दीं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े सात विभिन्न मामलों में आरोपियों की ओर से दर्ज मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द करने की मांग में याचिकाएं खारिज कर दीं। कोर्ट ने कहा कि मानवता के खिलाफ अपराधों में केवल समय बीतने या पुराने रिकॉर्ड की अनुपलब्धता को कार्यवाही रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीश कुमार गुप्ता की एकल पीठ ने प्रदीप अग्रवाल, जसवंत, राघवेंद्र त्रिपाठी, हरिकांत तिवारी और प्रकाश नारायण पांडेय की अलग-अलग याचिकाओं पर दिया है।
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नौबस्ता थाने में 1984 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की मौत के बाद हुए दंगे में याचियों के खिलाफ विभिन्न आरोपों में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। सभी के खिलाफ ट्रायल कोर्ट में मुकदमा लंबित है। याचियों ने समन आदेश सहित मुकदमे की कार्यवाही रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि मामले के मूल रिकॉर्ड (प्राथमिकी, अंतिम रिपोर्ट, पोस्टमार्टम रिपोर्ट आदि) उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कोई प्रभावी सुनवाई नहीं हो सकती।
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एसआईटी की ओर से दर्ज गवाहों के बयानों ने उनकी पहचान पर गंभीर संदेह पैदा किया। यह भी दलील दी कि आरोपी घटना के समय मौजूद नहीं थे। राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि सुप्रीम कोर्ट ने इन मामलों की दोबारा जांच के आदेश दिए थे, ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके। ऐसे में ट्रायल जारी रखा जाए।
कोर्ट ने कहा कि दंगों के दौरान निर्दोष लोगों की हत्या और संपत्तियों को जलाने जैसे जघन्य अपराध हुए थे, जिन्हें तकनीकी आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों के आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसलिए हस्तक्षेप की कोई आवश्यकता नहीं है।