सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court: Police protection is not a status symbol, it is necessary to prove a real threat.

High Court : पुलिस सुरक्षा स्टेटस सिंबल नहीं, वास्तविक खतरा साबित करना जरूरी

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 25 Feb 2026 05:46 PM IST
विज्ञापन
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस सुरक्षा कोई प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं है और न ही यह किसी व्यक्ति का मौलिक या वैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि राज्य किसी भी प्रकार का विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग नहीं बना सकता।

विज्ञापन

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस सुरक्षा कोई प्रतिष्ठा का प्रतीक नहीं है और न ही यह किसी व्यक्ति का मौलिक या वैधानिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि राज्य किसी भी प्रकार का विशेषाधिकार प्राप्त वर्ग नहीं बना सकता। सुरक्षा की मांग करने वाले व्यक्ति को अपने जीवन पर वास्तविक और ठोस खतरे का प्रमाण प्रस्तुत करना होगा। खतरे का आकलन करना संबंधित प्रशासनिक प्राधिकारियों का दायित्व है, न कि कोर्ट का।

Trending Videos


यह टिप्पणी न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव, न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने अलीगढ़ निवासी विकास चौधरी व एक अन्य की याचिका खारिज करते हुए की। याचियों ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव को निर्देश देने की मांग की थी कि उन्हें केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीआरपीएफ) की सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए। याचियों का आरोप था कि उन्होंने तीन प्राथमिकी दर्ज कराई हैं। पहली ईंट भट्ठे की चहारदीवारी और श्रमिक आवासों को क्षति पहुंचाने के संबंध में, दूसरी कथित फर्जी ट्रस्ट दस्तावेज को लेकर तथा तीसरी मोबाइल फोन हैकिंग से जुड़ी। उनकी ओर से यह दलील दी गई कि इन घटनाओं से उनकी जान को खतरा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कोर्ट कहा कि ऐसा कोई ठोस आधार सामने नहीं आया, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि याचियों के जीवन पर वास्तविक खतरा है। दर्ज एफआईआर में भी किसी ऐसे व्यक्ति का उल्लेख नहीं है, जिसने याचियों या उनके परिजनों को जान से मारने की धमकी दी हो।

साथ ही छह अगस्त-2023 के आदेश के तहत याचियों को पहले ही एक सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराया जा चुका है। सक्षम प्राधिकारी की ओर से खतरे का मूल्यांकन कर सुरक्षा प्रदान की जा चुकी है। ऐसे में अतिरिक्त सुरक्षा का निर्देश देना न्यायालय का काम नहीं है। कोर्ट ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद-226 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते समय न्यायालय को यह ध्यान रखना होता है कि सुरक्षा प्रदान करना कार्यपालिका का क्षेत्राधिकार है। न्यायालय तभी हस्तक्षेप करेगा जब निर्णय मनमाना या कानून के विपरीत हो।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed