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Prayagraj : मृत व्यक्ति के खिलाफ डिक्री पारित करना न्यायिक हत्या, जज के खिलाफ जांच के आदेश
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 25 Feb 2026 04:38 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के एक औद्योगिक प्लॉट के मालिकाना हक से जुड़े मामले में मृत व्यक्ति के पक्ष में डिक्री पारित करने को दिन दहाड़े न्यायिक हत्या करार दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाने वाले जज के खिलाफ जांच व अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति की है।
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के एक औद्योगिक प्लॉट के मालिकाना हक से जुड़े मामले में मृत व्यक्ति के पक्ष में डिक्री पारित करने को दिन दहाड़े न्यायिक हत्या करार दिया। कोर्ट ने फैसला सुनाने वाले जज के खिलाफ जांच व अनुशासनात्मक कार्यवाही की संस्तुति की है।
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यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की एकल पीठ ने गाजियाबाद नगर निगम की ओर से इंद्र मोहन सचदेव के खिलाफ दाखिल अपील पर दिया है। मामला गाजियाबाद के आनंद इंडस्ट्रियल एस्टेट स्थित प्लॉट नंबर नौ से जुड़ा है। वादी इंद्र मोहन सचदेव ने दावा किया था कि वह इस प्लॉट का कब्जे के आधार पर मालिक है। उसने 2019 में प्लॉट की वास्तविक मालकिन सुशीला मेहरा के खिलाफ एक केस जीता था, जो एकपक्षीय था। इसी डिक्री के आधार पर उसने नगर निगम से अपना नाम दर्ज करने का आदेश देने की मांग की थी।
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कोर्ट ने पाया कि जिस सुशीला मेहरा के खिलाफ 2022 में डिक्री हासिल की गई, उनकी मृत्यु दो अप्रैल 1996 को ही हो चुकी थी। कानूनन मृत व्यक्ति के खिलाफ पारित डिक्री शून्य होती है। नगर निगम ने सुशीला मेहरा का मृत्यु प्रमाणपत्र पेश किया था, लेकिन ट्रायल कोर्ट के जज ने इसे फोटोकॉपी बताकर खारिज कर दिया और वादी के पक्ष में फैसला सुना दिया।
ट्रायल कोर्ट का यह आचरण चौंकाने वाला और बाहरी विचारों से प्रेरित प्रतीत होता है। यह स्पष्ट रूप से न्यायिक कदाचार का मामला है, जो न्यायाधीश की ईमानदारी पर संदेह पैदा करता है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट
