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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   High Court ruling two-year gap between birth of first and second child is not mandatory for maternity leave

हाईकोर्ट का अहम फैसला: मातृत्व अवकाश के लिए पहली और दूसरी संतान के जन्म के बीच दो वर्ष का अंतर होना जरूरी नहीं

Thu, 23 Jul 2026 11:09 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 23 Jul 2026 11:09 AM IST
सार

Allahabad High Court : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मातृत्व अवकाश को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि पहली और दूसरी संतान के जन्म के बीच दो वर्ष का अंतर होना अनिवार्य नहीं है। अदालत ने कहा कि यदि किसी महिला कर्मचारी को सेवा नियमों के तहत दूसरी संतान के लिए मातृत्व अवकाश का अधिकार प्राप्त है, तो केवल दो वर्ष का अंतराल न होने के आधार पर उसका अवकाश आवेदन खारिज नहीं किया जा सकता। 

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High Court ruling two-year gap between birth of first and second child is not mandatory for maternity leave
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि मातृत्व अवकाश के लिए पहली और दूसरी संतान के जन्म के बीच दो वर्ष का अंतर होना जरूरी नहीं है। इस आधार पर किसी महिलाकर्मी को अवकाश देने से इन्कार नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कानपुर नगर निवासी स्टाफ नर्स शिखा यादव व एक अन्य की याचिका पर दिया है।

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कोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग की ओर से याची को मातृत्व अवकाश दिए जाने से इन्कार करने वाले छह व नौ जनवरी के आदेश का रद्द कर दिया। याचियों की मातृत्व अवकाश की अर्जी इस आधार पर खारिज कर दी गई थी कि उत्तर प्रदेश वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) और आठ दिसंबर 2008 के शासनादेश के अनुसार पहले मातृत्व अवकाश के दो वर्ष के भीतर दूसरा मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता।
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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश वित्तीय हैंडबुक की कार्यपालिका संबंधी व्यवस्था संसद के बनाए गए सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 के प्रावधानों पर हावी नहीं हो सकती। संहिता की धारा-161 स्पष्ट करती है कि यदि किसी अन्य कानून, नियम या कार्यपालिका के निर्देश उससे असंगत हैं तो संहिता के प्रावधान प्रभावी होंगे।
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कोर्ट ने आदेश में यह भी कहा कि सामाजिक सुरक्षा संहिता-2020 में पहली और दूसरी संतान के जन्म के बीच किसी न्यूनतम समय अंतराल की शर्त नहीं है। इसलिए केवल दो वर्ष का अंतर न होने के आधार पर किसी महिलाकर्मी को मातृत्व लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को याचियों की अर्जी पर दो हफ्ते में नए सिरे फैसला लेने का आदेश दिया है।

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