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UP : हाईकोर्ट ने कहा- बिना वकील बने पैरवी का अधिकार नहीं अधूरी जानकारी न्याय के लिए घातक
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Fri, 17 Apr 2026 05:21 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना विधि स्नातक और बार कौंसिल में पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति वकील की तरह मुकदमों की पैरवी नहीं कर सकता। कानून की आधी-अधूरी जानकारी न्याय व्यवस्था और वादकारियों के लिए नुकसानदेह है।
अदालत का फैसला।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि बिना विधि स्नातक और बार कौंसिल में पंजीकरण के कोई भी व्यक्ति वकील की तरह मुकदमों की पैरवी नहीं कर सकता। कानून की आधी-अधूरी जानकारी न्याय व्यवस्था और वादकारियों के लिए नुकसानदेह है। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की एकल पीठ ने इंजीनियर विश्राम सिंह की प्लीडर के रूप में बहस करने की मांग को लेकर दायर याचिका खारिज कर दी।
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कानपुर नगर निवासी इंजीनियर विश्राम सिंह का कहना था कि उन्हें कानून की जानकारी है, सुप्रीम कोर्ट के 100 से अधिक फैसले पढ़े हैं। इसलिए पक्ष रखने वाले (प्लीडर) के रूप में बहस की अनुमति दी जाए। ट्रायल कोर्ट ने सात मार्च 2025 को विश्राम सिंह के आवेदन को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि वह एडवोकेट एक्ट-1961 के तहत अधिवक्ता नहीं हैं। इसलिए उन्हें वकालत का अधिकार नहीं है।
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इसे उन्होंने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि वकालत करना एक विधिक पेशा है। इसके लिए विधि डिग्री और बार काैंसिल में पंजीकरण अनिवार्य है। किसी भी व्यक्ति को मुकदमे में प्रतिनिधित्व का सामान्य अधिकार नहीं है। यह केवल अधिवक्ताओं को ही प्राप्त है। साथ ही कोर्ट ने कहा कि विशेष परिस्थितियों में किसी व्यक्ति को सीमित उद्देश्य के लिए अनुमति दी जा सकती है पर यह अधिकार नहीं, अपवाद है।
कोर्ट ने याचिका खारिज कर रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि आदेश की एक प्रति सभी जिला न्यायाधीशों को भेजें। साथ ही जिला न्यायाधीश इस फैसले की एक प्रति सभी संबंधित न्यायाधीशों को भेजें, ताकि वे किसी को भी योग्यता के बिना बहस करने और दलील देने की अनुमति न दें।

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