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High Court : एसपी मिलते नहीं, अधीनस्थ याचिका वापस लेने का बना रहे दबाव
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 30 Apr 2026 02:26 PM IST
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सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले की एक नाबालिग लड़की की गुमशुदगी के मामले में पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने पाया कि पुलिस न केवल किशोरी को तलाश करने में विफल रही है।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल जिले की एक नाबालिग लड़की की गुमशुदगी के मामले में पुलिस के रवैये पर नाराजगी जताई है। अदालत ने पाया कि पुलिस न केवल किशोरी को तलाश करने में विफल रही है, बल्कि पीड़ित पिता को प्रताड़ित करने और याचिका वापस लेने के लिए डराने-धमकाने के गंभीर आरोप हैं। न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने इसे गंभीरता से लेते हुए पुलिस अधीक्षक को एक सप्ताह के भीतर पीड़िता को पेश करने और आरोपों पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है।
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मामले की सुनवाई के दौरान याची अकरम खान के वकील ने कोर्ट को अवगत कराया कि याची जब भी अपनी लापता बेटी की खोजबीन के लिए एसपी के कार्यालय जाता है, उसे सुनने के बजाय कार्यालय से बाहर निकलवा देते हैं। एसपी और उनके मातहत अधिकारी उसे याचिका वापस लेने के लिए दबाव डाल रहे हैं।
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वहीं, कोर्ट ने एसपी का हलफनामा पढ़ने के बाद कहा कि ऐसा लगता है जैसे एसपी अदालत को हल्के में ले रहे हैं। हलफनामे में केवल केस डायरी के पन्नों का विवरण देकर कहानियां सुनाई गई हैं। पीड़िता को तलाश करने के ठोस प्रयास नजर नहीं आते। एसपी संभल स्वयं के हलफनामे के माध्यम से स्पष्ट करें कि याचिकाकर्ता को प्रताड़ित करने और याचिका वापस लेने के लिए धमकाने के आरोपों पर उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
कोर्ट ने रजिस्ट्रार (अनुपालन) को आदेश दिया गया है कि वे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संभल के माध्यम से 24 घंटे के भीतर यह आदेश एसपी तक पहुंचाएं। मामले की अगली सुनवाई 07 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
