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High Court : मां से जुदा मासूमों की जुबानी दिल की बात जानेगी कोर्ट...पापा प्यारे या मामा

Mon, 13 Jul 2026 05:12 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 13 Jul 2026 05:12 AM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां के निधन के बाद मामा संग रह रहे दो मासूमों की जुबानी उनके दिल की आवाज सुनने का फैसला किया है। कोर्ट उनसे खुद बातचीत करेगा। जानेगा कि उन्हें पापा प्यारे हैं या मामा।

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High Court to hear the heartfelt words of innocent children separated from their mother
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मां के निधन के बाद मामा संग रह रहे दो मासूमों की जुबानी उनके दिल की आवाज सुनने का फैसला किया है। कोर्ट उनसे खुद बातचीत करेगा। जानेगा कि उन्हें पापा प्यारे हैं या मामा। इसके लिए कोर्ट ने 24 जुलाई को मामा को बच्चों संग कोर्ट में तलब किया है।

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यह आदेश न्यायमूर्ति संदीप जैन की अदालत ने वाराणसी के एक डॉक्टर पिता की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर दिया है। याचिका में कहा गया है कि 13 मई को फेफड़ों के कैंसर से याची की पत्नी का निधन हो गया। इसके बाद पत्नी के भाई उनके दोनों नाबालिग बेटों को अपने साथ ले गए। कई अनुरोधों के बावजूद वह बच्चों को नहीं भेज रहे हैं। उन्होंने शहर के नामी स्कूल में दोनों का कक्षा दो में दाखिला करा दिया है। फीस भी जमा कर दी है। इससे स्पष्ट है कि वह बच्चों की शिक्षा और परवरिश की जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

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वहीं, राज्य सरकार के अधिवक्ता ने बताया कि बच्चों ने पुलिस से बातचीत में अपनी नानी और मामा के साथ रहने की इच्छा जताई है। कोर्ट ने कहा कि सामान्य परिस्थितियों में मां के बाद जैविक पिता ही बच्चों की वैध अभिरक्षा के हकदार होते हैं, जब तक यह साबित न हो कि उनका साथ बच्चों के हित में नहीं है। मौजूदा मामले में ऐसा कोई साक्ष्य मौजूद नहीं है जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि बच्चे पिता के साथ असुरक्षित रहेंगे। लिहाजा, कोर्ट ने कहा कि अभिरक्षा का अंतिम फैसला बच्चों से बातचीत और उनके सर्वोत्तम हित का आकलन करने के बाद ही होगा।

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पेश न हुए बच्चे तो पुलिस को देनी होगी सफाई

कोर्ट ने चेतावनी दी है कि अगली तारीख पर दोनों बच्चों को हर हाल में पेश किया जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो संबंधित पुलिस अधिकारी को हलफनामा दाखिल कर बताना होगा कि आदेश का पालन क्यों नहीं हुआ और बच्चों को पेश करने के लिए क्या प्रभावी कदम उठाए गए।

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