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UP: इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकील से जज बने थे जस्टिस यशवंत वर्मा, रिटायरमेंट के पांच साल पहले ही दे दिया इस्तीफा
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sat, 11 Apr 2026 05:21 PM IST
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सार
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से ही वकालत शुरू की और यहीं पर न्यायमूर्ति बन गए। एक फरवरी 2016 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी।
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा (फाइल)
- फोटो : अमर उजाला / एजेंसी
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विस्तार
न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट से ही वकालत शुरू की और यहीं पर न्यायमूर्ति बन गए। एक फरवरी 2016 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली थी। 11 अक्तूबर 2021 को उनका स्थानांतरण दिल्ली हाईकोर्ट में हुआ था और पांच अप्रैल 2025 को उनका तबादला वापस इलाहाबाद हाईकोर्ट में कर दिया गया था। पांच जनवरी 2031 को उन्हें सेवानिवृत्त होना था। सेवानिवृत्ति से लगभग पांच साल पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया है।
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बता दें कि न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा का जन्म छह जनवरी 1969 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में हुआ था। उनकी प्रारंभिक और उच्च शिक्षा दिल्ली और मध्य प्रदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों से हुई। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के हंसराज कॉलेज से बीकॉम (ऑनर्स) की डिग्री प्राप्त करने के बाद रीवा विश्वविद्यालय मध्य प्रदेश से एलएलबी की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने आठ अगस्त 1992 को अधिवक्ता के रूप में अपना नामांकन कराया और इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत शुरू की।
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वकालत के दौरान उन्होंने सिविल, सांविधानिक, औद्योगिक विवाद, कॉरपोरेट, कराधान और पर्यावरण जैसे कानून के विविध क्षेत्रों में अपनी गहरी पैठ बनाई। उनकी कानूनी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें 2006 में इलाहाबाद हाईकोर्ट का विशेष अधिवक्ता नियुक्त किया गया। इसके अलावा उन्होंने 2012 से अगस्त 2013 तक उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी वकील के रूप में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
उनकी उत्कृष्ट कानूनी प्रतिभा के सम्मान में अगस्त 2013 में हाईकोर्ट ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में नामित किया। बाद में 13 अक्तूबर 2014 को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में नियुक्त किया गया। इसके बाद एक फरवरी 2016 को उन्होंने स्थायी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली।