{"_id":"69b6922213f495fe200220d9","slug":"lpg-crisis-lpg-shortage-extinguished-the-kitchen-fire-coal-and-wood-prices-also-scorched-2026-03-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"LPG Crisis : एलपीजी की किल्लत ने बुझाई रसोई की आग, कोयला-लकड़ी के दामों ने भी झुलसाया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
LPG Crisis : एलपीजी की किल्लत ने बुझाई रसोई की आग, कोयला-लकड़ी के दामों ने भी झुलसाया
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 15 Mar 2026 04:34 PM IST
विज्ञापन
सार
संगमनगरी में रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत ने कुछ घरों और होटलों के चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। गैस नहीं मिलने पर जब लोगों ने विकल्प के तौर पर कोयला और लकड़ी का रुख किया, तो वहां भी महंगाई की लपटों ने पसीने छुड़ा दिए।
ममफोर्डगंज स्थित गैस एजेंसी में गैस सिलिंडर लेने पहुंचे लोगों की भीड़। अमर उजाला।
- फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन
विस्तार
संगमनगरी में रसोई गैस (एलपीजी) की किल्लत ने कुछ घरों और होटलों के चूल्हे ठंडे पड़ने लगे हैं। गैस नहीं मिलने पर जब लोगों ने विकल्प के तौर पर कोयला और लकड़ी का रुख किया, तो वहां भी महंगाई की लपटों ने पसीने छुड़ा दिए। कुछ दिनों में कोयले की कीमतों में 75 फीसदी तक का उछाल आया है, वहीं लकड़ी के दाम एक हफ्ते में चार गुना तक बढ़ गए हैं।
Trending Videos
बाजार के जानकारों के मुताबिक, पिछले सप्ताह तक पत्थर का कोयला 40 से 50 रुपये प्रति किलो मिल रहा था, जो अब 70 रुपये किलो के पार पहुंच गया है। प्रयागराज जंक्शन के पास रेस्टोरेंट चलाने वाले संतोष कुमार बताते हैं सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से मजबूरी में भट्ठी सुलगाई है, लेकिन अब कोयला भी 70 रुपये किलो हो गया है। ऐसे में रेस्टोरेंट चलाना दूभर है।
विज्ञापन
विज्ञापन
चौक में कचौड़ी बेचने वाले राज यादव ने बताते हैं कि होली का बचा हुआ महज एक सिलिंडर है, जिसे वे सिर्फ कचौड़ी बनाने के लिए बचाकर रख रहे हैं। सब्जी और अन्य पकवानों के लिए वे भट्ठी का सहारा ले रहे हैं, लेकिन कोयले की बढ़ती कीमतों ने बजट बिगाड़ दिया है।
रामबाग में भोजनालय चलाने वाले संदीप गुप्ता कहते हैं कि काॅमर्शियल सिलिंडर नहीं मिलने से दिक्कत बढ़ी है। लकड़ी का भी रेट चार गुना तक बढ़ गया है। कोयला विक्रेता श्याम सुंदर ने बताया कि सर्दी के बाद एकाएक कोयला की मांग बढ़ी है। ढाबा, भोजनालय और चाय की दुकान चलाने वाले विक्रेता भट्टी के लिए कोयला खरीद रहे हैं। कारोबारी विजय गुप्ता ने बताया कि कोयला आवश्यक वस्तु अधिनियम में नहीं है। न ही इसके दामों पर सरकार का कोई नियंत्रण है। दुकानदार गुणवत्ता बताकर ज्यादा दाम ले रहे हैं।
एक नजर में महंगाई
ईंधन --- पहले की कीमत --- वर्तमान कीमत --- वृद्धि (लगभग)
पत्थर कोयला --- 40-50 रुपये/किलो --- 70 रुपये/किलो --- 75 फीसदी तक
लकड़ी --- 180-200 रुपये/कुंतल --- 600-800 रुपये/कुंतल --- चार गुना