गंगा में लगातार जलस्तर बढ़ने और कटान तेज होने की वजह से माघ मेले में आए कल्पवासियों की मुसीबतें बढ़ती जा रही हैं। शुक्रवार को भी शिविरों से पानी निकालने और फंसे कल्पवासियों, संतों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट कराने का सिलसिला चलता रहा। कड़ाके की ठंड में पानी से घिरने के बावजूद दर्जनों कल्पवासी प्रशासन की अपील पर दूसरी जगहों पर जाने के लिए तैयार नहीं हुए। इस बीच प्रवाह रोकने के लिए मेला प्रशासन ने अस्थाई तटबंध बनाने शुरू कर दिए हैं।
माघ मेला : कटान, दलदल के बाद शिविरों में पानी, चौतरफा मुसीबतों में घिरे कल्पवासी
संगम की रेती पर 580 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसे माघ मेले पर असमय गंगा के जल प्रवाह में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है। वह भी ऐसे समय जब अभी मेले के तीन स्नान पर्व बाकी है।मौनी अमावस्या का स्नान अगले माह की एक फरवरी को होगा।
कहीं उजड़ न जाए जप-तप-ध्यान का मेला
जिस तरह से जलस्तर बढ़ रहा है उससे आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर योगी आदित्यनाथ सरकार ने शीर्ष स्तर पर पहल करके जल प्रवाह को पश्चिमी नगरों में डायवर्ट करने या रोकने का उपाय नहीं किया तो समय से पहले ही जप,तप,ध्यान का मेला उजड़ने के लिए मजबूर हो जाएगा।
मंडलायुक्त संजय गोयल ने शुक्रवार को अफसरों के साथ प्रभावित इलाकों का दौरा किया। उन्होंने सेक्टर तीन स्थित गंगद्वीप के अलावा सेक्टर-दो के अलावा अन्य प्रभावित स्थानों पर प्रवाह रोकने के लिए सिंचाई विभाग को उपाय करने के निर्देश दिए। मंडलायुक्त ने कहा कि मैन पावर बढ़ाए जाएं और ट्रैक्टर, पंप की संख्या बढ़ाकर मेला क्षेत्र से पानी निकाला जाए, ताकि कल्पवासियों को राहत मिल सके।
मंडलायुक्त ने प्रभावित संस्थाओं की सूची बनाने और उनको शिफ्ट कराकर मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश दिए। साथ ही कहा कि जो लोग मूलभूत सुविधाएं देने के बाद भी स्थानांतरित नहीं होना चाहते, उनसे लिखित सहमति ली जाए।
सुविधा के लिए महिला साध्वी के नग्न प्रदर्शन का मामला लखनऊ पहुंचा
महिला साध्वी के मेलाधिकारी कार्यालय पर नग्न प्रदर्शन करने की खबर लखनऊ तक पहुंच गई है। परी अखाड़े की पीठाधीश्वर ने हफ्तों मेलाधिकारी कार्यालय का चक्कर काटने के बाद नग्न प्रदर्शन किया था, लेकिन इसके बाद भी उनको सुविधाएं नहीं मिल सकीं।
इस मामले में मेला प्रशासन के कुछ अफसरों पर गाज गिरने के भी संकेत मिले हैं। इस मेला क्षेत्र में शुक्रवार को निरीक्षण के दौरान मंडलायुक्त को बताया गया कि इस बार कई संस्थाओं को अनुमन्य सुविधाएं अभी तक नहीं मिल सकी हैं। इस पर उन्होंने प्रभारी मेलाधिकारी को निर्देशित किया कि जो भी संस्थाएं अनुमन्य हैं, उन्हें सुविधाएं दी जाएं।
गंगा का जलस्तर बढ़ने से मेला क्षेत्र टापू में तब्दील हो गया है। इससे अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है।