NCR Railway : अब बोड़ाकी नहीं, कहिए ग्रेटर नोएडा रेलवे स्टेशन, 20 वंदे भारत रेक की रहेगी होल्डिंग क्षमता
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) प्रयागराज जोन के अंतर्गत आने वाला बोड़ाकी हॉल्ट अब इतिहास बनने जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की साझा योजना के तहत इस छोटे से हॉल्ट को अब ग्रेटर नोएडा रेलवे स्टेशन के रूप में नई पहचान मिलेगी।
विस्तार
उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) प्रयागराज जोन के अंतर्गत आने वाला बोड़ाकी हॉल्ट अब इतिहास बनने जा रहा है। केंद्र और राज्य सरकार की साझा योजना के तहत इस छोटे से हॉल्ट को अब ग्रेटर नोएडा रेलवे स्टेशन के रूप में नई पहचान मिलेगी। यह देश का एक अत्याधुनिक मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब होगा, जो नोएडा और ग्रेटर नोएडा के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक होने से इसकी उपयोगिता और बढ़ जाएगी। यह पहला मौका होगा जब नोएडा के नाम से किसी बड़े रेलवे स्टेशन की स्थापना की जा रही है। रेलवे स्टेशन का विस्तार को दो चरणों में पूरा करने की योजना है। कुल 13 प्लेटफॉर्म वाले इस स्टेशन के पहले चरण में नौ प्लेटफॉर्म तैयार किए जाएंगे, जिनमें दो अप लाइन और सात डाउन लाइन के लिए होंगे।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए यहां वंदे भारत ट्रेनों के 20 रेक और एलएचबी ट्रेनों के 20 रेक की होल्डिंग क्षमता होगी। पहले चरण की शुरुआत के साथ ही यहां 115 ट्रेनों का ठहराव प्रस्तावित है, जिसमें लंबी दूरी की करीब 70 एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल होंगी, जिससे दिल्ली और आनंद विहार जैसे स्टेशनों पर दबाव काफी कम हो जाएगा। परियोजना की रेलवे से जुड़ी फाइलों पर इसे ग्रेटर नोएडा स्टेशन ही लिखा जा रहा है।
भूमि का अधिग्रहण किया गया तेज
परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है। पूरे प्रोजेक्ट के लिए कुल 200.84 हेक्टेयर जमीन की आवश्यकता है। इसमें से अकेले रेलवे की जरूरतों के लिए 110.54 हेक्टेयर जमीन चाहिए, जबकि फिलहाल रेलवे के पास 55 हेक्टेयर जमीन उपलब्ध है। शेष भूमि की उपलब्धता होते ही निर्माण कार्यों में और तेजी आएगी। इस हब के विकसित होने से न केवल नोएडा और ग्रेटर नोएडा बल्कि समूचे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास और कनेक्टिविटी को नई उड़ान मिलने की उम्मीद है।
एनसीआर ने तैयार किया रेलवे स्टेशन का इंजीनियरिंग स्टेट प्लान
इस मेगा प्रोजेक्ट को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी केंद्र सरकार की एजेंसी नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी) और राज्य सरकार की एजेंसी इंटीग्रेटेड इंडस्ट्रियल टाउनशिप ग्रेटर नोएडा लिमिटेड (आईआईटीजीएनएल) को सौंपी गई है। खास बात यह है कि इस पूरे प्रोजेक्ट की फंडिंग भी इन्हीं दोनों एजेंसियों द्वारा संयुक्त रूप से की जाएगी। इस परिवहन केंद्र को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यात्रियों को एक ही छत के नीचे रेलवे, इंटर स्टेट बस टर्मिनल, लोकल बस टर्मिनल और रैपिड रेल की सुविधाएं मिल सकेंगी। उत्तर मध्य रेलवे ने स्टेशन का इंजीनियरिंग स्टेट प्लान (ईएसपी) बनाकर सबमिट कर दिया है।
एनसीआर प्रशासन ने प्रस्तावित रेलवे स्टेशन का इंजीनियरिंग स्टेट प्लान बनाकर उसे संबंधित एजेंसी को सबमिट कर दिया है। इस स्टेशन का नाम ग्रेटर नोएडा हो सकता है। - शशिकांत त्रिपाठी, सीपीआरओ, एनसीआर
प्रस्तावित योजना
- पहले चरण का निर्माण कार्य होने के बाद यहां पर लंबी दूरी की 33 ट्रेनों का ठहराव करने की है योजना।
- दूसरे चरण का काम पूरा होने के बाद यहां से रेलवे द्वारा लंबी दूरी व सबअर्बन समेत कुल 115 ट्रेनों का किया जाएगा संचालन।
- स्टेशन पर बिछाई जाएंगी कुल 33 लाइन, सिक लाइन एवं वॉशिंग लाइन की भी रहेगी व्यवस्था।
- 20-20 वंदे भारत एवं एलएचबी ट्रेनों के रेक खड़े रहने की रहेगी व्यवस्था।
- इस मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब की कुल लागत तकरीबन 5500 करोड़ रुपये है, रेलवे स्टेशन के निर्माण पर खर्च होंगे 1726 करोड़ रुपये।