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High Court : केवल सिविल कोर्ट ही सुलझा सकता है बीएचएस और जीएचएस स्कूल के प्रबंधन का विवाद

अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Fri, 17 Apr 2026 12:41 PM IST
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सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बॉयज हाईस्कूल (बीएचएस) और गर्ल्स हाईस्कूल (जीएचएस) के प्रबंधन और नियंत्रक के दशकों पुराने मामले पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है।

Only civil court can resolve the dispute between the management of BHS and GHS schools.
ब्वॉयज हाईस्कूल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बॉयज हाईस्कूल (बीएचएस) और गर्ल्स हाईस्कूल (जीएचएस) के प्रबंधन और नियंत्रक के दशकों पुराने मामले पर महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने जॉन ऑगस्टीन की ओर से दायर विशेष अपील सहित नौ अन्य अपीलों पर फैसला सुनाया।

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कोर्ट कहा कि चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (सीएनआई) और चर्च ऑफ इंडिया, पाकिस्तान, बर्मा और सीलोन (सीआईपीबीसी) के बीच का विवाद केवल सक्षम सिविल कोर्ट के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है। कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि 1970 में चर्चों का विलय हुआ या नहीं, कौन व्यक्ति कानूनी रूप से बिशप है। यह तय करने की शक्ति रजिस्ट्रार के पास नहीं है।
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कोर्ट ने बीएचएस व जीएचएस स्कूलों के बैंक खातों का संचालन प्रधानाचार्य और जिलाधिकारी की ओर से नामित एडीएम स्तर के अधिकारी की ओर से संयुक्त रूप से करने का आदेश दिया है। सक्षम सिविल न्यायालय के अंतिम या अंतरिम आदेश पारित होने तक यह व्यवस्था जारी रहेगी।

साथ ही कोर्ट ने एकल पीठ की ओर से पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति उमेश कुमार को पर्यवेक्षक बनाए जाने के आदेश को भी रद्द कर दिया। बता दें कि याची जॉन ऑगस्टीन ने विशेष अपील दायर कर इलाहाबाद हाईस्कूल सोसाइटी व संस्थानों का नियंत्रण देने की प्रार्थना की थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मालिकाना हक और बिशप की नियुक्ति की वैधता जैसे मुद्दों पर फैसला साक्ष्य के आधार पर केवल सिविल कोर्ट ही कर सकता है।

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