Prayagraj Murder Case : भाई-भाभी को फंसाने के लिए अभिषेक ने लिखा- बंटी-बबली बहू ने मारा
Prayagraj Crime News : हत्या के बाद अभिषेक और शनि ने जांच को गुमराह करने की भी कोशिश की। अभिषेक ने लाल पेन से एक गत्ते पर लिख दिया, बंटी-बबली बहू ने मारा। इसका मकसद अपने भाई अश्विनी और उसकी पत्नी रीतू को हत्या के मामले में फंसाना था।
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हत्या के बाद अभिषेक और शनि ने जांच को गुमराह करने की भी कोशिश की। अभिषेक ने लाल पेन से एक गत्ते पर लिख दिया, बंटी-बबली बहू ने मारा। इसका मकसद अपने भाई अश्विनी और उसकी पत्नी रीतू को हत्या के मामले में फंसाना था, जिन्हें परिवार में बंटी-बबली के नाम से जाना जाता था। इसके अलावा अभिषेक ने घर में मौजूद फाइलें, कपड़े, लैपटॉप, मोबाइल और अन्य सामान पानी की टंकी में डाल दिए ताकि कोई साक्ष्य न बच सके।
हत्या के बाद दोनों आरोपियों ने घटनास्थल से सबूत मिटाने का भी प्रयास किया। दुर्गंध से बचने के लिए तीनों शवों को कंबल-रजाई से ढक दिया गया और फर्श पर गिरे खून के निशान मिटाने के लिए डिटर्जेंट पाउडर, हार्पिक, ब्लीचिंग पाउडर, हल्दी और सरसों का तेल डाला गया। पूरे घर की फर्श को गर्म पानी और डिटर्जेंट से धोया गया। घटनास्थल से पानी में भीगा टी-शर्ट और सफाई में इस्तेमाल अन्य कपड़े मिले। जिससे पुलिस को शुरुआत से ही साक्ष्य मिटाने की आशंका हुई थी।
परिवार के तीन लोगों की हत्या के बाद दोनों नीचे दुकान में पहुंचे और लूटे गए जेवरों का बंटवारा करने लगे। इसी दौरान विवाद शुरू हो गया। शनि का आरोप है कि अभिषेक उसे महज पांच कंगन देना चाहता था। इसी बात पर दोनों के बीच कहासुनी हुई और फिर शनि ने उसी लोहे की रॉड से अभिषेक के सिर पर हमला कर दिया। गंभीर चोट लगने से अभिषेक की भी मौत हो गई। इसके बाद शनि पूरे जेवर को मकान के पिछले हिस्से से छज्जा पर रखकर वहां से निकल गया।
पुलिस आयुक्त के निर्देशन में कोतवाली पुलिस, जनपदीय व नगर एसओजी तथा सर्विलांस टीम ने घटनास्थल की गहन जांच की। सीसीटीवी फुटेज में एक व्यक्ति मृतक वीरेंद्र वैश्य के कपड़े और जूते पहनकर कॉम्प्लेक्स से निकलता दिखाई दिया। स्थानीय लोगों से पूछताछ में उसकी पहचान शनि गुप्ता के रूप में हुई।
पिता से नाराज चल रहा था अभिषेक
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि अभिषेक अपने पिता से नाराज था। वर्ष 2022 में उसे संपत्ति से बेदखल कर दिया गया था और वह कर्ज में भी डूबा था। 31 मई की शाम दोनों ने परिवार के सदस्यों की हत्या कर जेवर लूटने की योजना बनाई। सबसे पहले नीचे दुकान खोलने आई मीनाक्षी पर लोहे की रॉड से हमला किया गया। इसके बाद ऊपर जाकर वीरेंद्र वैश्य और उनकी पत्नी अनीता की हत्या कर दी गई।
पुलिस के अनुसार, हत्या के बाद दोनों ने अलमारी से जेवर निकाले और साक्ष्य मिटाने के लिए शवों पर डिटर्जेंट, हार्पिक, ब्लीचिंग पाउडर, हल्दी और सरसों का तेल डाला। फर्श को गर्म पानी और डिटर्जेंट से धोया गया। परिवार के अन्य सदस्यों को फंसाने के लिए एक दफ्ती पर लाल पेन से "बंटी-बबली बहू ने मारा" भी लिखा गया था।
जेवरों के बंटवारे के दौरान बदल गई नीयत
जेवरों के बंटवारे के दौरान शनि गुप्ता की नीयत बदल गई। पुलिस के मुताबिक, अभिषेक उसे केवल कुछ चूड़ियां और एक हार देने की बात कर रहा था। इसी बात पर विवाद हुआ और शनि ने लोहे के पाइप से अभिषेक की भी हत्या कर दी। इसके बाद उसने पूरे जेवर अपने कब्जे में कर लिए और दुकान तथा मकान में ताला लगाकर फरार हो गया।
पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर उसकी दुकान के ऊपर बने बारजे से 1002.12 ग्राम सोने के आभूषण, 360.56 ग्राम चांदी के जेवर, एक हजार रुपये नकद और हत्या में प्रयुक्त लोहे का पाइप बरामद किया है। बरामदगी के आधार पर मुकदमे में लूट की धारा भी बढ़ाई गई है।
पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और आरोपी की निशानदेही के आधार पर मामले का सफल अनावरण किया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश कर जेल भेजने की कार्रवाई की जा रही है।