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High Court : चश्मदीदों की अचूक गवाही खत्म कर देती है संदेह की संभावना, हत्याकांड के दोषियों की सजा बरकरार

Sat, 20 Jun 2026 06:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 20 Jun 2026 06:15 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा के 26 साल पुराने बहुचर्चित जमील प्रधान हत्याकांड में उम्रकैद पाए फारुख और फीमा की सजा पर मुहर लग दी है। कोर्ट ने कहा दिनदहाड़े हुई वारदात पर चश्मदीदों की अचूक गवाही से संदेह की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं।

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Unassailable eyewitness testimony eliminates any possibility of doubt; sentences of those convicted in
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बांदा के 26 साल पुराने बहुचर्चित जमील प्रधान हत्याकांड में उम्रकैद पाए फारुख और फीमा की सजा पर मुहर लग दी है। कोर्ट ने कहा दिनदहाड़े हुई वारदात पर चश्मदीदों की अचूक गवाही से संदेह की संभावनाएं खत्म हो जाती हैं। यह फैसला न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनाया है। बांदा सत्र न्यायालय ने चश्मदीद गवाहों के बयानों पर भरोसा करते हुए 2005 में दोनों दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ दोनों दोषियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

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यह खूनी वारदात 25 नवंबर 2002 को दोपहर लगभग दो बजे बांदा के छावनी चौराहे पर हुई थी। गोयरा गांव के तत्कालीन प्रधान जमील खान अपने भाइयों के साथ अनाज का सौदा कर दिलहागंज से लौट रहे थे। तभी रंजिश को लेकर घात लगाए बैठे गांव के ही फारुख और फीमा मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे। दोनों ने अवैध देसी पिस्तौलों से जमील पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। छाती और बांह में गोली लगने से गंभीर रूप से घायल जमील की अगले दिन कानपुर के अस्पताल में मौत हो गई थी।
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वारदात में एक राहगीर भी घायल हुआ था। पुलिस ने बाद में आरोपी फीमा की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त अवैध असलहा और कारतूस भी बरामद किए थे, जिसे हाईकोर्ट ने पुख्ता सबूत माना। कोर्ट ने यह भी पाया कि मामले के चश्मदीद उबैद और अली हुसैन ने वारदात का जो विस्तृत और आंखोंदेखा विवरण गवाही में पेश किया है उसमें अविश्वास करने का कोई कारण नहीं है।
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पूरी वारदात दोपहर के उजाले में अंजाम दी गई थी। इसलिए न तो हमलावरों की पहचान को लेकर कोई विवाद खड़ा होता है और ना ही घटना स्थल को लेकर कोई संशय बचता है। लिहाजा, कोर्ट ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए जमानत पर चल रहे दोनों दोषियों को तत्काल ट्रायल कोर्ट में आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है।

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