फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Further investigation permissible even after acceptance of police's final report

UP : पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद भी कर सकते हैं आगे की जांच, विवेचना रोकने की याचिका खारिज

Wed, 12 Aug 2026 06:25 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 12 Aug 2026 06:25 PM IST
सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 के हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कहा कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद भी कानून के तहत मामले की आगे की जांच कर सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने से आगे की जांच पर रोक नहीं लगती।

विज्ञापन
Further investigation permissible even after acceptance of police's final report
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 के हत्या के मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। कहा कि पुलिस अंतिम रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद भी कानून के तहत मामले की आगे की जांच कर सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अंतिम रिपोर्ट स्वीकार किए जाने से आगे की जांच पर रोक नहीं लगती। यह आदेश न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह की एकल पीठ ने अनुराग दुबे उर्फ दब्बन की याचिका पर दिया है।

विज्ञापन


मामला मैनपुरी के बेवर थाने में 2005 में दर्ज हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़ा है। पुलिस ने जांच के बाद 2006 में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया था। दो दशक बाद सूचनाकर्ता की ओर से मामले में आगे की जांच की मांग की गई। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इसे याची ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
विज्ञापन


याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि अंतिम रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद करीब 20 वर्ष की देरी से जांच दोबारा शुरू करना कानूनन उचित नहीं है। वहीं, राज्य और सूचनाकर्ता की ओर से कहा गया कि नई सामग्री सामने आने पर धारा 173(8) सीआरपीसी के तहत आगे की जांच की जा सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसले का हवाला दिया। कहा कि आगे की जांच और पुनः जांच अलग-अलग हैं। कोर्ट ने कहा कि अंतिम रिपोर्ट स्वीकार होने के बाद भी आगे की जांच पर कानूनी रोक नहीं है। कोर्ट ने यह भी कहा कि जांच के स्तर पर आरोपी को अनिवार्य रूप से सुनवाई का अधिकार नहीं है। इसी के साथ याचिका खारिज कर दी। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed