{"_id":"69c4f68c01474320c403b6e2","slug":"veg-biryani-replaces-favourite-parathas-street-vendors-troubled-by-gas-cylinder-shortage-2026-03-26","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj : वेज बिरयानी ने ले ली पंसदीदा पराठों की जगह, गैस सिलिंडर की किल्लत से स्ट्रीट वेंडर परेशान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj : वेज बिरयानी ने ले ली पंसदीदा पराठों की जगह, गैस सिलिंडर की किल्लत से स्ट्रीट वेंडर परेशान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 26 Mar 2026 02:34 PM IST
विज्ञापन
सार
वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत और ईंधन के बढ़ते दामों ने शहर के रेस्टोरेंट, ढाबा और नाइट मार्केट के गणित को बिगाड़ दिया है। ईंधन बचाने के चक्कर में कुछ ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों ने मेन्यू छोटा कर दिया है।
वेज बिरयानी।
- फोटो : अमर उजाला।
विज्ञापन
विस्तार
वाणिज्यिक गैस सिलिंडर की किल्लत और ईंधन के बढ़ते दामों ने शहर के रेस्टोरेंट, ढाबा और नाइट मार्केट के गणित को बिगाड़ दिया है। ईंधन बचाने के चक्कर में कुछ ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों ने मेन्यू छोटा कर दिया है। तवे पर बनने वाले पराठों की जगह अब वेज बिरयानी ने ले ली है।
Trending Videos
प्रयागराज के नाइट मार्केट में वाणिज्यिक सिलिंडर की अनुपलब्धता का सीधा असर दिख रहा है। यहां कई स्टॉल खुल ही नहीं पा रहे हैं। जो खुल रहे हैं, उनके सामने भी लागत निकालने की चुनौती है। दुकानदारों का कहना है कि अगर यही स्थिति रही तो आने वाले दिनों में कारोबार ठप हो जाएगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिन ढाबों पर वेज पराठा ग्राहकों की पहली पसंद हुआ करता था, अब वहां वेज बिरयानी ज्यादा बिक रही है। संचालकों का कहना है कि पराठा बनाने में गैस और समय दोनों ज्यादा खर्च होते हैं, जबकि बिरयानी एक बार में बड़े बर्तन में तैयार हो जाती है जिससे लागत कम आती है। अल्लापुर, दारागंज, जानसेनगंज और अटाला जैसे इलाकों में दुकानदारों ने वैकल्पिक इंतजाम के तौर पर लकड़ी और डीजल का सहारा लिया लेकिन लागत इतनी बढ़ गई कि कुछ ने दुकान ही बंद कर दी।
तेलियरगंज के वेंडर रमेश पटेल बताते हैं कि पराठे के लिए लगातार आंच चाहिए, जो अब मुमकिन नहीं। इसकी जगह अब वेज बिरयानी बेची जा रही है। सिविल लाइंस में ढाबा चलाने वाले विशाल कनौजिया ने बताया कि तीन-चार दिन से वह भट्ठी पर ही खाना बनवा रहे हैं।
चाट की कटोरी भी हुई महंगी
सिर्फ खाना ही नहीं, शाम का नाश्ता भी अब जेब पर भारी पड़ रहा है। कोयले और लकड़ी के दाम बढ़ने से चाट विक्रेताओं ने भी रेट कार्ड बदल दिए हैं। आलू टिक्की, टमाटर आदि के दामों में पांच से 10 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। चाट विक्रेता रामजी अग्रहरि कहते हैं कि न गैस मिल रही है और न ही कोयला सस्ता है। किसी तरह से दुकान चला रहे हैं।