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Ambedkar Nagar News: खेल की नर्सरी में सूख रही प्रतिभाओं की फसल
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श्रीमती सुमित्रा देवी शुक्ला राजकीय बालिका इंटर कॉलेज आलापुर में खेल मैदान के स्थान पर रिक्त स्
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अंबेडकरनगर। जिले के विद्यालयों में खेल सुविधाओं की कमी से प्रतिभाएं प्रभावित हो रही हैं। खिलाड़ियों की शुरुआत विद्यालय के छोटे मैदानों से होती है, जहां वे खेल भावना सीखते हैं। जिले के 364 माध्यमिक विद्यालयों में 728 खिलाड़ियों की मजबूत खेप तैयार हो सकती है, पर मैदानों की कमी बाधा बन रही है।
विद्यालय के मैदान खेल संस्कृति की नींव होते हैं। सुबह की प्रार्थना के बाद दौड़ का अभ्यास एथलेटिक्स की शुरुआत करता है। कबड्डी आत्मविश्वास बढ़ाती है, खो-खो फुर्ती विकसित करता है। क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेल टीम भावना को मजबूत करते हैं। जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें सही अवसर चाहिए। कई विद्यालयों में खेल यात्रा मैदान और संसाधनों की कमी से रुक जाती है। बेहतर मैदान और प्रशिक्षण सुविधाएं मिलने पर यह आंकड़ा जिले की खेल पहचान बन सकता है। जिले में 32 राजकीय, 60 वित्त विहीन और 272 निजी विद्यालय हैं। कुल 364 माध्यमिक विद्यालयों में से केवल आठ राजकीय विद्यालयों में खेल शिक्षक हैं। यह स्थिति खेल सुविधाओं की कमी को दर्शाती है।
कहीं मैदान बदहाल, तो कहीं है ही नहीं
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जलालपुर में स्थापना के बाद भी खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। बनहवा बाबा इंटर कॉलेज एकडल्ला (बसखारी) में न खेल मैदान है, न खेल विशेषज्ञ शिक्षक। सुमित्रा देवी शुक्ला राजकीय बालिका इंटर कॉलेज आलापुर में मैदान के अभाव में खेल गतिविधियां सीमित हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा का मैदान झाड़ियों और असमतल जमीन से प्रभावित है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अकबरपुर का मैदान रखरखाव के अभाव में झाड़ियों से भरा है। राजकीय हाईस्कूल लखनपुर बसखारी में बारिश के बाद मैदान में पानी और कीचड़ भर जाता है। राजकीय इंटर कॉलेज अकबरपुर का मैदान निर्माण सामग्री और जलभराव से उपयोग के लायक नहीं है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज रामनगर में खेल मैदान नहीं है, सीमित जगह में ही गतिविधियां संचालित होती हैं।
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विद्यालय के मैदान खेल संस्कृति की नींव होते हैं। सुबह की प्रार्थना के बाद दौड़ का अभ्यास एथलेटिक्स की शुरुआत करता है। कबड्डी आत्मविश्वास बढ़ाती है, खो-खो फुर्ती विकसित करता है। क्रिकेट और फुटबॉल जैसे खेल टीम भावना को मजबूत करते हैं। जिले में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, उन्हें सही अवसर चाहिए। कई विद्यालयों में खेल यात्रा मैदान और संसाधनों की कमी से रुक जाती है। बेहतर मैदान और प्रशिक्षण सुविधाएं मिलने पर यह आंकड़ा जिले की खेल पहचान बन सकता है। जिले में 32 राजकीय, 60 वित्त विहीन और 272 निजी विद्यालय हैं। कुल 364 माध्यमिक विद्यालयों में से केवल आठ राजकीय विद्यालयों में खेल शिक्षक हैं। यह स्थिति खेल सुविधाओं की कमी को दर्शाती है।
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कहीं मैदान बदहाल, तो कहीं है ही नहीं
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज जलालपुर में स्थापना के बाद भी खेल मैदान उपलब्ध नहीं है। बनहवा बाबा इंटर कॉलेज एकडल्ला (बसखारी) में न खेल मैदान है, न खेल विशेषज्ञ शिक्षक। सुमित्रा देवी शुक्ला राजकीय बालिका इंटर कॉलेज आलापुर में मैदान के अभाव में खेल गतिविधियां सीमित हैं। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज इनामीपुर टांडा का मैदान झाड़ियों और असमतल जमीन से प्रभावित है। राजकीय बालिका इंटर कॉलेज अकबरपुर का मैदान रखरखाव के अभाव में झाड़ियों से भरा है। राजकीय हाईस्कूल लखनपुर बसखारी में बारिश के बाद मैदान में पानी और कीचड़ भर जाता है। राजकीय इंटर कॉलेज अकबरपुर का मैदान निर्माण सामग्री और जलभराव से उपयोग के लायक नहीं है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय मॉडल इंटर कॉलेज रामनगर में खेल मैदान नहीं है, सीमित जगह में ही गतिविधियां संचालित होती हैं।
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