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Ambedkar Nagar News: विश्वास और श्रद्धा जीवन की स्थिरता का आधार
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Sun, 25 Jan 2026 10:40 PM IST
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कटेहरी। क्षेत्र के शिव बाबा धाम परिसर में पांच दिवसीय रामकथा के तीसरे दिन रविवार को राम जन्म प्रसंग का वर्णन किया गया।
प्रवाचक राकेश ने कहा कि विश्वास और श्रद्धा जीवन की स्थिरता का आधार हैं। मर्यादा और कर्तव्य पालन सामाजिक संतुलन बनाए रखते हैं। दान और सेवा समाज में समानता और सहयोग को बढ़ाते हैं।
आदर्श आचरण नेतृत्व की पहचान बनता है। धार्मिक कथाएं जीवन मूल्यों को समझने का माध्यम हैं। शिव का अर्थ विश्वास और पार्वती का अर्थ श्रद्धा है। उन्होंने बताया कि जिनके जीवन में विश्वास और श्रद्धा का समन्वय होता है, उनके हृदय में राम तत्व का प्राकट्य होता है। भक्ति का आधार भावनाओं के साथ-साथ दृढ़ विश्वास और आंतरिक श्रद्धा है।
अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ का आयोजन कराया था। यज्ञ संपन्न होने के बाद उनकी तीनों रानियों ने यज्ञ का प्रसाद ग्रहण किया, जिसके परिणामस्वरूप गर्भधारण हुआ। चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र में कौशल्या के गर्भ से राम का जन्म हुआ।
देवगण पुष्पवर्षा के लिए उपस्थित हुए और नगर को शोभायमान किया गया। राजा दशरथ की ओर से ब्राह्मणों को स्वर्ण, गो, वस्त्र और आभूषण दान देने का उल्लेख भी कथा में किया गया।
प्रवाचक ने कहा कि राम विष्णु के सातवें अवतार हैं और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका अवतरण धरती पर धर्म, ज्ञान और मर्यादा की स्थापना के लिए हुआ था। राम का जीवन आदर्श आचरण, संयम और कर्तव्य पालन का उदाहरण है, जिसे समाज आज भी मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार करता है। इस दौरान रमाकांत पांडेय, महंत ओम प्रकाश गोस्वामी, प्रमोद पांडेय, भोला, जितेंद्र तिवारी, दिनेश पांडेय व अन्य उपस्थित रहे।
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प्रवाचक राकेश ने कहा कि विश्वास और श्रद्धा जीवन की स्थिरता का आधार हैं। मर्यादा और कर्तव्य पालन सामाजिक संतुलन बनाए रखते हैं। दान और सेवा समाज में समानता और सहयोग को बढ़ाते हैं।
आदर्श आचरण नेतृत्व की पहचान बनता है। धार्मिक कथाएं जीवन मूल्यों को समझने का माध्यम हैं। शिव का अर्थ विश्वास और पार्वती का अर्थ श्रद्धा है। उन्होंने बताया कि जिनके जीवन में विश्वास और श्रद्धा का समन्वय होता है, उनके हृदय में राम तत्व का प्राकट्य होता है। भक्ति का आधार भावनाओं के साथ-साथ दृढ़ विश्वास और आंतरिक श्रद्धा है।
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अयोध्या के राजा दशरथ ने पुत्र प्राप्ति के लिए यज्ञ का आयोजन कराया था। यज्ञ संपन्न होने के बाद उनकी तीनों रानियों ने यज्ञ का प्रसाद ग्रहण किया, जिसके परिणामस्वरूप गर्भधारण हुआ। चैत्र शुक्ल नवमी को पुनर्वसु नक्षत्र में कौशल्या के गर्भ से राम का जन्म हुआ।
देवगण पुष्पवर्षा के लिए उपस्थित हुए और नगर को शोभायमान किया गया। राजा दशरथ की ओर से ब्राह्मणों को स्वर्ण, गो, वस्त्र और आभूषण दान देने का उल्लेख भी कथा में किया गया।
प्रवाचक ने कहा कि राम विष्णु के सातवें अवतार हैं और उन्हें मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। उनका अवतरण धरती पर धर्म, ज्ञान और मर्यादा की स्थापना के लिए हुआ था। राम का जीवन आदर्श आचरण, संयम और कर्तव्य पालन का उदाहरण है, जिसे समाज आज भी मार्गदर्शक के रूप में स्वीकार करता है। इस दौरान रमाकांत पांडेय, महंत ओम प्रकाश गोस्वामी, प्रमोद पांडेय, भोला, जितेंद्र तिवारी, दिनेश पांडेय व अन्य उपस्थित रहे।
