Ground Report: अंबेडकरनगर में विकास की क्या है जमीनी हकीकत? पर्यटन-उद्योग और ग्रामीण परिवेश में कितना बदलाव
अमर उजाला की टीम जमीनी हकीकत जानने अंबेडकर नगर पहुंची। जानें इस जिले की कितनी सूरत बदली है? इस रिपोर्ट में लोगों की राय, बदलाव और कमियों की पूरी तस्वीर सामने रखी गई है।
विस्तार
यूपी में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। 28 मार्च को जेवर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की रैली के बाद दादरी में समाजवादी पार्टी (सपा) ने भी जनसभा की। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार विकास कार्यों और अनपी योजनाओं को आधार बनाकर दोबारा सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं के मुद्दों पर सरकार को घेरने में जुटा है। जमीनी हकीकत को जानने के लिए अमर उजाला की टीम प्रदेश के अलग-अलग जिलों का दौरा कर रही है। इसी कड़ी में टीम अंबेडकर नगर जिले में पहुंची।
जिले के पर्यटन के विकास के लिए क्या कुछ हुआ काम?
इस सवाल का जवाब तलाशते हुए हम अंबेडकर नगर के श्रवण धाम पहुंचे। जहां हमने क्षेत्र के पूर्व प्रधान ओम प्रकाश गोस्वामी से बात की। उन्होंने बताया कि श्रवण धाम एक पौराणिक स्थल है। राजा दशरथ के शब्दभेदी बाण से श्रवण कुमार के माता-पिता ने यहीं पर अपने प्राण त्यागे। 2023 से पहले यहां विकास के नाम पर बहुत कुछ नहीं था। उपचुनाव हुआ, जिसमें भाजपा के प्रत्याशी जीते। तब से यहां विकास के कई कार्य हुए। यहां से चार किलोमीटर दूर भगवान शिव का मंदिर है। उसके लिए 65 फीट चौड़ी सड़क बनवाई गई। वहां यात्रियों के ठहरने के लिए एक हॉल बनवाया गया। प्रधान शकुंतला देवी ने बताया कि हमने यहां इंटरलॉकिंग का काम कराया। ग्रामीण जीवन और पर्यटन पर सकारात्मक असर दिख रहा है।
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अंबेडकर नगर के उद्योगों को कितनी मिली मजबूती?
इस सवाल के जवाब के लिए हम पहुंचे आर्यांश एग्रो केमिकल्स प्राइवेट लिमिडेट में, जहां हमने कंपनी के संचालक आनंद वर्मा से बातचीत की। इस सरकार की देन है कि हम यहां जमीन ले पाए हैं। इस कंपनी की स्थापना में प्रशासन से काफी सहयोग मिला। इस इंडस्ट्री को लगाने में करीब 27-28 लाइसेंस जरूरी होते हैं। आज से 10-15 साल पहले लोग इंडस्ट्री बनाकर खड़ी कर देते थे, लेकिन लाइसेंस नहीं मिलते थे। लेकिन आज जैसे-जैसे हमारी इंडस्ट्री बनती गई, वैसे-वैसे मुझे लाइसेंस मिलते चले गए। सिंगल विंडो सिस्टम होने से काफी लाभ मिला है। श्रमिक गंगा शरण गुप्ता ने बताया कि अब हम लोगों को यहां रोजगार मिल रहा है। सभी से अपील करते हैं ईमानदारी करके अपना काम करें।
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जिले के ग्रामीण परिवेश में क्या आया बदलाव?
गांव के विकास को देखने के लिए अमर उजाला की टीम अंबेडकर नगर के कनकपट्टी ग्राम पंचायत पहुंची। यहां के लोगों से बात की और जानने की कोशिश की कि उनकी ग्राम पंचायत में कितना विकास हुआ है। ग्राम प्रधान बालमुकुंद वर्मा ने कहा, 2015 के बाद से इस गांव में कोई सरकारी बिल्डिंग नहीं थी कि बैठक की जा सके। सबसे पहले पंचायत भवन का निर्माण कराया गया और गांव में जितनी भी कच्ची गलियां थी घरों से पानी निकलने के लिए नालियों की व्यवस्था कराई गई। 2021 में हमें जीत मिली। 2021 के बाद से हमने उस विकास को आगे बढ़ाने का काम किया। हमें 2023-24 में मुख्यमंत्री प्रथम पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार 35 लाख रुपये मिला। 2024-25 में मुख्यमंत्री पुरस्कार से 20 लाख रुपये मिले। जिन्हें हमने गांव के विकास कार्यों में लगाया। अनुसूचित बस्ती ढिहवा में हमने बिजली की बेहतर व्यवस्था की।
स्थानीय निवासी संगीत वर्मा ने कहा, हमारे यहां दो साल पहले पानी की कमी थी। सूखा पड़ गया था। इस समस्या से निटने के लिए प्रधान ने सरकारी नल लगवाया। पानी की टंकी बन गई। इसके बाद घर घर में पानी जा रहा है। तीनों टाइम पानी आ रहा है।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा कि यहां बहुत कुछ बदलाव देखने को मिला है। गांव में 70 फीसदी आबादी झोपड़ पट्टी में रहती थी। यहां पर कॉलोनी बनाई गई। आवास के मामले में बेहतर विकास हुआ है। पानी की समस्या भी दूर हो गई है। समय पर पानी मिलता है।
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