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Ambedkar Nagar News: जेई पीड़ित आईसीयू में भर्ती, 35 लोगों की हुई सैंपलिंग
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जहांगीरगंज के सांती चकभदैया गांव में जेई का केस आने के बाद बुधवार को ग्रामीणों की जांच करती स्व
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अंबेडकरनगर। जिले में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) का मरीज मिलने के बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हो गया है। बुधवार को सीडीओ आनंद कुमार शुक्ला, डीपीआरओ उपेंद्र कुमार पांडेय समेत स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने गांव पहुंच कर हालात का जायजा लिया। गांव में साफ-सफाई के साथ कीटनाशक दवाओंं को छिड़काव कराया गया। साथ ही अधिकारियों ने लोगों को बचाव के लिए जागरूक भी किया।
जहांगीरगंज के सांती चकभदैया गांव निवासी आजाद गौर को 12 दिन पूर्व बुखार आने के बाद परिजन युवक को महराजगंज उपचार के लिए ले गए थे। युवक को राहत न मिलने पर आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद भी हालत में सुधार न होने पर उसे केजीएमयू में भर्ती किया, जहां जांच में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की पुष्टि हुई। उसका आईसीयू में इलाज चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
बुधवार को सीडीओ आनंद शुक्ला, डीपीआरओ उपेंद्र पांडेय, सीएचसी अधीक्षक डॉ. कमलेश चौधरी स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव पहुंचे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव का निरीक्षण किया। गांव में वृहद सफाई अभियान चलाया गया व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है। इसके साथ ही पीड़ित युवक के घर के आठ लोगों को सहित कुल 35 ग्रामीणों की जांच कराई गई है। इन सभी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। सीडीओ ने संबंधित अधिकारियों को लगाकर निगरानी रखने और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
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ऐसे फैलती है बीमारी
जब क्यूलेक्स प्रजाति का मच्छर रोग से ग्रसित सूअर या जंगली पक्षियों का रक्त चूसता है तो उस रोग के वायरस मच्छर में पहुंच जाते हैं। जब यह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह व्यक्ति भी इस रोग की चपेट में आ जाता है। संक्रमण के शिकार व्यक्ति में इस रोग के लक्षण 5 से 15 दिनों के बीच देखने को मिलते हैं। जिसे ‘इंक्युबेशन पीरियड’ कहते हैं। यह रोग अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में सबसे ज्यादा फैलता है। सबसे पहले इस वायरस की पहचान जापान में हुई थी, जिसकी वजह से इस रोग का नाम ‘जापानी इंसेफेलाइटिस’ रखा गया।
इस तरह करें बचाव
मच्छर जहां उत्पन्न होते हैं, वहां मेलाथियान नामक कीटनाशक का छिड़काव करें। घरों की खिड़की और रोशनदानों में जालियां लगवाकर रखें। इसके अलावा रात को सोते समय मच्छरदानी का भी प्रयोग करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। अगर इस रोग से पीड़ित मरीज बेहोशी की हालत में है तो उसके मुंह में कुछ न डालें, उसे पीठ के बल बिल्कुल न लिटाएं। भोजन से पहले और जानवरों के संपर्क में आने के बाद हाथों को जरूर साफ करें।
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जहांगीरगंज के सांती चकभदैया गांव निवासी आजाद गौर को 12 दिन पूर्व बुखार आने के बाद परिजन युवक को महराजगंज उपचार के लिए ले गए थे। युवक को राहत न मिलने पर आजमगढ़ के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। इसके बाद भी हालत में सुधार न होने पर उसे केजीएमयू में भर्ती किया, जहां जांच में जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) की पुष्टि हुई। उसका आईसीयू में इलाज चल रहा है। फिलहाल उसकी हालत स्थिर बनी हुई है।
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बुधवार को सीडीओ आनंद शुक्ला, डीपीआरओ उपेंद्र पांडेय, सीएचसी अधीक्षक डॉ. कमलेश चौधरी स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ गांव पहुंचे। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने गांव का निरीक्षण किया। गांव में वृहद सफाई अभियान चलाया गया व कीटनाशक दवाओं का छिड़काव भी कराया जा रहा है। इसके साथ ही पीड़ित युवक के घर के आठ लोगों को सहित कुल 35 ग्रामीणों की जांच कराई गई है। इन सभी के नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं। सीडीओ ने संबंधित अधिकारियों को लगाकर निगरानी रखने और व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के निर्देश दिए हैं।
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ऐसे फैलती है बीमारी
जब क्यूलेक्स प्रजाति का मच्छर रोग से ग्रसित सूअर या जंगली पक्षियों का रक्त चूसता है तो उस रोग के वायरस मच्छर में पहुंच जाते हैं। जब यह मच्छर किसी स्वस्थ व्यक्ति को काटता है तो वह व्यक्ति भी इस रोग की चपेट में आ जाता है। संक्रमण के शिकार व्यक्ति में इस रोग के लक्षण 5 से 15 दिनों के बीच देखने को मिलते हैं। जिसे ‘इंक्युबेशन पीरियड’ कहते हैं। यह रोग अगस्त, सितंबर और अक्तूबर में सबसे ज्यादा फैलता है। सबसे पहले इस वायरस की पहचान जापान में हुई थी, जिसकी वजह से इस रोग का नाम ‘जापानी इंसेफेलाइटिस’ रखा गया।
इस तरह करें बचाव
मच्छर जहां उत्पन्न होते हैं, वहां मेलाथियान नामक कीटनाशक का छिड़काव करें। घरों की खिड़की और रोशनदानों में जालियां लगवाकर रखें। इसके अलावा रात को सोते समय मच्छरदानी का भी प्रयोग करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। अगर इस रोग से पीड़ित मरीज बेहोशी की हालत में है तो उसके मुंह में कुछ न डालें, उसे पीठ के बल बिल्कुल न लिटाएं। भोजन से पहले और जानवरों के संपर्क में आने के बाद हाथों को जरूर साफ करें।