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Ambedkar Nagar News: धैर्य और अनुशासन से मिलते हैं परिणाम
संवाद न्यूज एजेंसी, अम्बेडकरनगर
Updated Mon, 23 Feb 2026 10:48 PM IST
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कटेहरी। क्षेत्र के चनहा पकड़ी में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को राजा उत्तानपाद और बालक ध्रुव के प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक पंकज शास्त्री ने बताया कि धैर्य और अनुशासन से परिणाम मिलते हैं।
उम्र सफलता में बाधा नहीं होती, दृढ़ निश्चय महत्वपूर्ण होता है। कम उम्र में भी बड़े संकल्प संभव होते हैं। संकट में सही मार्गदर्शन जरूरी है। एक लक्ष्य पर केंद्रित प्रयास असाधारण परिणाम दे सकते हैं। राजा उत्तानपाद के दो पुत्र ध्रुव और उत्तम थे। ध्रुव की माता सुनीति थीं, जबकि उत्तम की माता सुरुचि थीं। एक प्रसंग में जब ध्रुव ने अपने पिता की गोद में बैठने का प्रयास किया, तब सुरुचि ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि इस स्थान का अधिकार केवल उनके पुत्र को है। इस घटना से बालक ध्रुव आहत हुए। माता सुनीति ने ध्रुव को धैर्य रखने और ईश्वर की शरण में जाने की प्रेरणा दी। इसके बाद ध्रुव वन की ओर चले गए और कठोर तपस्या की। उनकी अटूट साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें अचल स्थान का वरदान दिया। यही ध्रुव पद आगे चलकर ध्रुव तारे के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
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लक्ष्य के प्रति अटल निश्चय से सफलता संभव
जलालपुर। क्षेत्र के एकडंगा सेमरा में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को विदुर और विदुरानी प्रसंग का वर्णन किया। प्रवाचक रामजस मिश्रा ने बताया कि सच्ची निष्ठा और समर्पण बाहरी दिखावे से अधिक प्रभावी होते हैं। लक्ष्य के प्रति अटल निश्चय से सफलता संभव है।कौरवों के मंत्री विदुर नीति और धर्म के प्रतीक माने जाते थे। एक प्रसंग में जब ठाकुर जी के स्वागत के लिए गांधारी की ओर से छप्पन भोग तैयार किए गए, तब उन्होंने राजसी व्यंजन स्वीकार नहीं किए। इसके विपरीत वे विदुर के घर पहुंचे। वहां विदुरानी प्रेम और भाव में इतनी तल्लीन थीं कि उन्होंने केले के फल की जगह उसके झिलके ही परोस दिए। ठाकुर जी ने प्रेमवश उन झिलकों को भी स्वीकार किया। संवाद
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स्थायी नहीं होते शक्ति और वैभव
फोटो - 16
भीटी। क्षेत्र के नरायनपुर घाट स्थित निजी अस्पताल परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक आचार्य औचित्यानंद राघव दास ने बताया कि वचनबद्धता और प्रतिबद्धता व्यक्ति के चरित्र की पहचान होती है। शक्ति और वैभव स्थायी नहीं होते। जब दैत्यराज बलि के प्रभाव से तीनों लोकों में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हुई, तब भगवान ने वामन रूप धारण किया। बाल ब्राह्मण के स्वरूप में उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा। दो पग में संपूर्ण पृथ्वी और आकाश नाप लेने के बाद तीसरे पग के लिए स्थान शेष नहीं रहा। तब राजा बलि ने स्वयं को समर्पित किया। संवाद
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नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी
कटेहरी। क्षेत्र के आदमपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को राजा बलि और वामन अवतार प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक मुकेशानंद ने बताया कि परिस्थितियों में समर्पण और विनम्रता व्यक्ति को संतुलन प्रदान करती है। जीवन में संतुलन और न्याय के लिए नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी है।परिवार और समाज में सकारात्मक संस्कार दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ते हैं। देवताओं और दैत्यों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए मंथन किया। इस दौरान अनेक रत्न प्रकट हुए। संवाद
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हवन-यज्ञ के साथ समापन
आलापुर। क्षेत्र के बड़की पड़ौली बनकटा बुजुर्ग में श्रीमद्भागवत कथा का समापन सोमवार को हवन-यज्ञ और पूर्णाहुति के साथ हुआ। सातवें दिन विधि-विधान से हवन-यज्ञ संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई। इसके बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ। हवन-यज्ञ में गांव के परिवारों ने भाग लिया। संवाद
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उम्र सफलता में बाधा नहीं होती, दृढ़ निश्चय महत्वपूर्ण होता है। कम उम्र में भी बड़े संकल्प संभव होते हैं। संकट में सही मार्गदर्शन जरूरी है। एक लक्ष्य पर केंद्रित प्रयास असाधारण परिणाम दे सकते हैं। राजा उत्तानपाद के दो पुत्र ध्रुव और उत्तम थे। ध्रुव की माता सुनीति थीं, जबकि उत्तम की माता सुरुचि थीं। एक प्रसंग में जब ध्रुव ने अपने पिता की गोद में बैठने का प्रयास किया, तब सुरुचि ने उन्हें यह कहकर रोक दिया कि इस स्थान का अधिकार केवल उनके पुत्र को है। इस घटना से बालक ध्रुव आहत हुए। माता सुनीति ने ध्रुव को धैर्य रखने और ईश्वर की शरण में जाने की प्रेरणा दी। इसके बाद ध्रुव वन की ओर चले गए और कठोर तपस्या की। उनकी अटूट साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए और उन्हें अचल स्थान का वरदान दिया। यही ध्रुव पद आगे चलकर ध्रुव तारे के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
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लक्ष्य के प्रति अटल निश्चय से सफलता संभव
जलालपुर। क्षेत्र के एकडंगा सेमरा में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को विदुर और विदुरानी प्रसंग का वर्णन किया। प्रवाचक रामजस मिश्रा ने बताया कि सच्ची निष्ठा और समर्पण बाहरी दिखावे से अधिक प्रभावी होते हैं। लक्ष्य के प्रति अटल निश्चय से सफलता संभव है।कौरवों के मंत्री विदुर नीति और धर्म के प्रतीक माने जाते थे। एक प्रसंग में जब ठाकुर जी के स्वागत के लिए गांधारी की ओर से छप्पन भोग तैयार किए गए, तब उन्होंने राजसी व्यंजन स्वीकार नहीं किए। इसके विपरीत वे विदुर के घर पहुंचे। वहां विदुरानी प्रेम और भाव में इतनी तल्लीन थीं कि उन्होंने केले के फल की जगह उसके झिलके ही परोस दिए। ठाकुर जी ने प्रेमवश उन झिलकों को भी स्वीकार किया। संवाद
स्थायी नहीं होते शक्ति और वैभव
फोटो - 16
भीटी। क्षेत्र के नरायनपुर घाट स्थित निजी अस्पताल परिसर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को वामन अवतार और कृष्ण जन्मोत्सव प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक आचार्य औचित्यानंद राघव दास ने बताया कि वचनबद्धता और प्रतिबद्धता व्यक्ति के चरित्र की पहचान होती है। शक्ति और वैभव स्थायी नहीं होते। जब दैत्यराज बलि के प्रभाव से तीनों लोकों में असंतुलन की स्थिति उत्पन्न हुई, तब भगवान ने वामन रूप धारण किया। बाल ब्राह्मण के स्वरूप में उन्होंने राजा बलि से तीन पग भूमि का दान मांगा। दो पग में संपूर्ण पृथ्वी और आकाश नाप लेने के बाद तीसरे पग के लिए स्थान शेष नहीं रहा। तब राजा बलि ने स्वयं को समर्पित किया। संवाद
नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी
कटेहरी। क्षेत्र के आदमपुर में श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन सोमवार को राजा बलि और वामन अवतार प्रसंग का वर्णन किया गया। प्रवाचक मुकेशानंद ने बताया कि परिस्थितियों में समर्पण और विनम्रता व्यक्ति को संतुलन प्रदान करती है। जीवन में संतुलन और न्याय के लिए नैतिक मूल्यों का पालन जरूरी है।परिवार और समाज में सकारात्मक संस्कार दीर्घकालिक प्रभाव छोड़ते हैं। देवताओं और दैत्यों ने मिलकर अमृत प्राप्ति के लिए मंथन किया। इस दौरान अनेक रत्न प्रकट हुए। संवाद
हवन-यज्ञ के साथ समापन
आलापुर। क्षेत्र के बड़की पड़ौली बनकटा बुजुर्ग में श्रीमद्भागवत कथा का समापन सोमवार को हवन-यज्ञ और पूर्णाहुति के साथ हुआ। सातवें दिन विधि-विधान से हवन-यज्ञ संपन्न कराया गया। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति दी गई। इसके बाद प्रसाद वितरण का कार्यक्रम आयोजित हुआ। हवन-यज्ञ में गांव के परिवारों ने भाग लिया। संवाद
