{"_id":"6a1b3547094aa7ffd109c521","slug":"god-goes-away-as-soon-as-pride-comes-amethi-news-c-96-1-ame1002-167017-2026-05-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"Amethi News: अभिमान आते ही दूर हो जाते हैं भगवान","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Amethi News: अभिमान आते ही दूर हो जाते हैं भगवान
Sun, 31 May 2026 12:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 31 May 2026 12:36 AM IST
विज्ञापन
सिंहपुर के अहोरवा भवानी कस्बे में कथा सुनते श्रद्धालु। स्रोत: आयोजक
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सिंहपुर। अहोरवा भवानी कस्बे में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन शनिवार को प्रवाचक मोहित कृष्ण ने कहा कि जीव परमात्मा का अंश है। प्रत्येक व्यक्ति के भीतर अपार शक्ति विद्यमान रहती है। जीवन में किसी लक्ष्य की प्राप्ति में बाधा आती है तो उसका प्रमुख कारण संकल्प की कमी होती है।
प्रवाचक ने कहा कि निष्कपट भाव और दृढ़ निश्चय रखने वाला साधक ईश्वर की कृपा प्राप्त करता है। मनुष्य के भीतर अभिमान का भाव उत्पन्न होते ही भगवान उससे दूर हो जाते हैं। विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण ही भक्ति का वास्तविक आधार है। कहा कि जब भक्त भगवान के दर्शन न होने पर विरह की अनुभूति करता है और सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, तब श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं तथा उसे अपने सान्निध्य का अनुभव कराते हैं।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है। व्यक्ति को अपने आचरण में सरलता और सत्यनिष्ठा अपनानी चाहिए। भक्ति का मार्ग बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता से प्रशस्त होता है। इस अवसर पर कमलेश गुप्ता, त्रिवेणी सोनी, रीता सोनी, दलजीत सिंह, जयकांत श्रीवास्तव, विजय पांडेय, राजेंद्र शुक्ल, कुंवर बहादुर और ब्रजेश पाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रवाचक ने कहा कि निष्कपट भाव और दृढ़ निश्चय रखने वाला साधक ईश्वर की कृपा प्राप्त करता है। मनुष्य के भीतर अभिमान का भाव उत्पन्न होते ही भगवान उससे दूर हो जाते हैं। विनम्रता, श्रद्धा और समर्पण ही भक्ति का वास्तविक आधार है। कहा कि जब भक्त भगवान के दर्शन न होने पर विरह की अनुभूति करता है और सच्चे मन से उनका स्मरण करता है, तब श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते हैं तथा उसे अपने सान्निध्य का अनुभव कराते हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए मन, वचन और कर्म की शुद्धता आवश्यक है। व्यक्ति को अपने आचरण में सरलता और सत्यनिष्ठा अपनानी चाहिए। भक्ति का मार्ग बाहरी आडंबर नहीं, बल्कि अंतर्मन की पवित्रता से प्रशस्त होता है। इस अवसर पर कमलेश गुप्ता, त्रिवेणी सोनी, रीता सोनी, दलजीत सिंह, जयकांत श्रीवास्तव, विजय पांडेय, राजेंद्र शुक्ल, कुंवर बहादुर और ब्रजेश पाल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन