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Amethi News: खेल मैदान मिले तभी उड़ान भरेंगी प्रतिभाएं
Tue, 28 Jul 2026 12:55 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Tue, 28 Jul 2026 12:55 AM IST
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अमेठी सिटी। जिले के 248 माध्यमिक विद्यालयों में सिर्फ 19 विद्यालयों में ही पर्याप्त खेल मैदान हैं। शेष 229 विद्यालयों के विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास की सुविधा नहीं मिल रही। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भूमि, साझा खेल परिसर, सीएसआर और जनभागीदारी से इस समस्या का समाधान संभव है।
खेल मैदानों की कमी का असर अब खेल प्रतिभाओं पर भी दिखने लगा है। सेवानिवृत्त जिला क्रीड़ाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि जिन विद्यालयों के पास पर्याप्त भूमि नहीं है, उनके आसपास उपलब्ध ग्राम समाज, राजस्व अथवा अन्य सरकारी भूमि पर खेल मैदान विकसित किए जा सकते हैं। भवन निर्माण और अतिक्रमण से समाप्त हो चुके पुराने मैदानों को भी राजस्व अभिलेखों के आधार पर पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।
सेवानिवृत्त व्यायाम शिक्षक डॉ. श्याम सुंदर सिंह ने कहा कि खेल मैदान किसी भी खिलाड़ी की पहली पाठशाला होते हैं। नियमित अभ्यास से ही प्रतिभाएं निखरती हैं। उपक्रीड़ाधिकारी अरविंद सिंह कुशवाहा ने बताया कि हर विद्यालय में बड़ा मैदान विकसित करना संभव नहीं है। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर साझा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार कर आसपास के कई विद्यालयों के विद्यार्थियों को सुविधा दी जा सकती है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि जहां भूमि का अभाव है, वहां साझा खेल परिसर बेहतर विकल्प है।
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ऐसे लौट सकते हैं स्कूलों के मैदान
- खेल मैदान विहीन विद्यालयों का सर्वे कराया जाए।
- खाली सरकारी भूमि पर खेल मैदान विकसित किए जाएं।
- पुराने मैदानों से अतिक्रमण हटाकर पुनर्जीवित किया जाए।
- ब्लॉक स्तर पर साझा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जाएं।
- सीएसआर व मनरेगा से खेल सुविधाएं विकसित हों।
- समाज और विद्यालय प्रबंधन समिति की भागीदारी बढ़ाई जाए।
खिलाड़ियों ने बताई मैदान की अहमियत
अंतरराष्ट्रीय धाविका सुधा सिंह ने कहा कि अच्छे खिलाड़ी की शुरुआत स्कूल के मैदान से होती है। राष्ट्रीय धावक अभिषेक पाल ने नियमित अभ्यास के लिए हर विद्यालय में मैदान या साझा रनिंग ट्रैक की जरूरत बताई। राष्ट्रीय धावक अंतिम पाल ने कहा कि सुरक्षित और समतल मैदान मिलने से खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
समाधान की दिशा में होगी सार्थक पहल
जिलाधिकारी संजय चौहान ने कहा कि विद्यालयों में खेल मैदान उपलब्ध कराना बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ा विषय है। जिन विद्यालयों में मैदान का अभाव है, वहां उपलब्ध सरकारी भूमि, ग्राम पंचायतों, सीएसआर और जनभागीदारी के माध्यम से व्यवहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे। संबंधित विभागों के समन्वय से इस दिशा में कार्ययोजना बनाकर आगे बढ़ा जाएगा।
फैक्ट फाइल
कुल माध्यमिक विद्यालय : 248
पर्याप्त खेल मैदान वाले विद्यालय : 19
खेल मैदान नहीं : 229
मैदान हैं, व्यायाम शिक्षक नहीं : 4
व्यायाम शिक्षक हैं, मैदान नहीं : 3
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे खिलाड़ी : 7
राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त खिलाड़ी : 5
राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक विजेता : 1
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खेल मैदानों की कमी का असर अब खेल प्रतिभाओं पर भी दिखने लगा है। सेवानिवृत्त जिला क्रीड़ाधिकारी सुरेश कुमार सिंह ने कहा कि जिन विद्यालयों के पास पर्याप्त भूमि नहीं है, उनके आसपास उपलब्ध ग्राम समाज, राजस्व अथवा अन्य सरकारी भूमि पर खेल मैदान विकसित किए जा सकते हैं। भवन निर्माण और अतिक्रमण से समाप्त हो चुके पुराने मैदानों को भी राजस्व अभिलेखों के आधार पर पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।
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सेवानिवृत्त व्यायाम शिक्षक डॉ. श्याम सुंदर सिंह ने कहा कि खेल मैदान किसी भी खिलाड़ी की पहली पाठशाला होते हैं। नियमित अभ्यास से ही प्रतिभाएं निखरती हैं। उपक्रीड़ाधिकारी अरविंद सिंह कुशवाहा ने बताया कि हर विद्यालय में बड़ा मैदान विकसित करना संभव नहीं है। ऐसे में ब्लॉक स्तर पर साझा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स तैयार कर आसपास के कई विद्यालयों के विद्यार्थियों को सुविधा दी जा सकती है। जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ. राजेश कुमार द्विवेदी ने कहा कि जहां भूमि का अभाव है, वहां साझा खेल परिसर बेहतर विकल्प है।
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ऐसे लौट सकते हैं स्कूलों के मैदान
- खेल मैदान विहीन विद्यालयों का सर्वे कराया जाए।
- खाली सरकारी भूमि पर खेल मैदान विकसित किए जाएं।
- पुराने मैदानों से अतिक्रमण हटाकर पुनर्जीवित किया जाए।
- ब्लॉक स्तर पर साझा स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स बनाए जाएं।
- सीएसआर व मनरेगा से खेल सुविधाएं विकसित हों।
- समाज और विद्यालय प्रबंधन समिति की भागीदारी बढ़ाई जाए।
खिलाड़ियों ने बताई मैदान की अहमियत
अंतरराष्ट्रीय धाविका सुधा सिंह ने कहा कि अच्छे खिलाड़ी की शुरुआत स्कूल के मैदान से होती है। राष्ट्रीय धावक अभिषेक पाल ने नियमित अभ्यास के लिए हर विद्यालय में मैदान या साझा रनिंग ट्रैक की जरूरत बताई। राष्ट्रीय धावक अंतिम पाल ने कहा कि सुरक्षित और समतल मैदान मिलने से खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
समाधान की दिशा में होगी सार्थक पहल
जिलाधिकारी संजय चौहान ने कहा कि विद्यालयों में खेल मैदान उपलब्ध कराना बच्चों के सर्वांगीण विकास से जुड़ा विषय है। जिन विद्यालयों में मैदान का अभाव है, वहां उपलब्ध सरकारी भूमि, ग्राम पंचायतों, सीएसआर और जनभागीदारी के माध्यम से व्यवहारिक समाधान तैयार किए जाएंगे। संबंधित विभागों के समन्वय से इस दिशा में कार्ययोजना बनाकर आगे बढ़ा जाएगा।
फैक्ट फाइल
कुल माध्यमिक विद्यालय : 248
पर्याप्त खेल मैदान वाले विद्यालय : 19
खेल मैदान नहीं : 229
मैदान हैं, व्यायाम शिक्षक नहीं : 4
व्यायाम शिक्षक हैं, मैदान नहीं : 3
राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे खिलाड़ी : 7
राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त खिलाड़ी : 5
राष्ट्रीय स्तर पर रजत पदक विजेता : 1