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Amethi News: रात में निकलने की जिद बनी काल
Sat, 30 May 2026 12:47 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sat, 30 May 2026 12:47 AM IST
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शाहगढ़। मुंशीगंज के बबुरीटोला दरपीपुर गांव में आयोजित भंडारे में शामिल होने आए रिश्तेदारों को क्या पता था कि घर वापसी का सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा। लोकीपुर गांव के पास हुए हादसे में चाचा-भतीजे और जीजा की मौत ने तीन परिवारों की खुशियां छीन लीं। हादसे की खबर पहुंचते ही घरों में कोहराम मच गया।
बबलू ने बताया कि भंडारा समाप्त होने के बाद उन्होंने साले शनि वर्मा को रात में न निकलने और सुबह घर जाने की सलाह दी थी। हालांकि वह नहीं माने। वह अपने भतीजे प्रिंस के साथ एक बाइक से निकले, जबकि दूसरी बाइक पर उनके साढ़ू मनोज उर्फ राजू और रिश्तेदार अजीत सवार थे। कुछ ही देर बाद लोकीपुर के पास हुए हादसे में शनि, प्रिंस और मनोज की मौत हो गई, जबकि अजीत गंभीर रूप से घायल हो गए।
एक ही परिवार के चाचा और भतीजे की मौत की खबर सुनकर परिजन बदहवास हो गए। गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ मृतकों के घर जुटी रही। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने में लगा था, लेकिन अपनों को खोने का दर्द किसी से छिप नहीं रहा था। शुक्रवार को गांव में पूरे दिन मातम पसरा रहा। लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
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बेटे और पोते को खोकर टूट गया परिवार
चाचा-भतीजे शनि और प्रिंस की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रिंस की मां मंजू बेटे को याद कर बिलख रही हैं। भाई अंश और कार्तिक की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। शनि की पत्नी नेहा और बेटी मानसी बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। बेटे और पोते की मौत से अलमोला सदमे में हैं। श्यामलाल की आंखों से आंसू नहीं थम रहे। बहन ज्ञानमती रोते हुए बार-बार यही कह रही थीं कि रात में जाने से मना किया था, लेकिन किसी ने नहीं सुनीं।
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बबलू ने बताया कि भंडारा समाप्त होने के बाद उन्होंने साले शनि वर्मा को रात में न निकलने और सुबह घर जाने की सलाह दी थी। हालांकि वह नहीं माने। वह अपने भतीजे प्रिंस के साथ एक बाइक से निकले, जबकि दूसरी बाइक पर उनके साढ़ू मनोज उर्फ राजू और रिश्तेदार अजीत सवार थे। कुछ ही देर बाद लोकीपुर के पास हुए हादसे में शनि, प्रिंस और मनोज की मौत हो गई, जबकि अजीत गंभीर रूप से घायल हो गए।
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एक ही परिवार के चाचा और भतीजे की मौत की खबर सुनकर परिजन बदहवास हो गए। गांव में शोक की लहर दौड़ गई। रिश्तेदारों और ग्रामीणों की भीड़ मृतकों के घर जुटी रही। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने में लगा था, लेकिन अपनों को खोने का दर्द किसी से छिप नहीं रहा था। शुक्रवार को गांव में पूरे दिन मातम पसरा रहा। लोगों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
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बेटे और पोते को खोकर टूट गया परिवार
चाचा-भतीजे शनि और प्रिंस की मौत के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। प्रिंस की मां मंजू बेटे को याद कर बिलख रही हैं। भाई अंश और कार्तिक की आंखों से आंसू थम नहीं रहे। शनि की पत्नी नेहा और बेटी मानसी बार-बार बेसुध हो जा रही हैं। बेटे और पोते की मौत से अलमोला सदमे में हैं। श्यामलाल की आंखों से आंसू नहीं थम रहे। बहन ज्ञानमती रोते हुए बार-बार यही कह रही थीं कि रात में जाने से मना किया था, लेकिन किसी ने नहीं सुनीं।