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Amethi News: भक्ति के बिना मनुष्य का जीवन निरर्थक
संवाद न्यूज एजेंसी, अमेठी
Updated Sun, 08 Feb 2026 12:44 AM IST
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संग्रामपुर के तिवारीपुर करनाईपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनते श्रोता। स्रोत आयोजक
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संग्रामपुर। तिवारीपुर करनाईपुर गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के पांचवें दिन शनिवार को प्रवाचक आचार्य संतोष त्रिपाठी ने भक्ति और कर्मयोग के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भक्ति ही जीवन को सार्थक दिशा देती है। यदि मनुष्य के पास सभी भौतिक सुख-सुविधाएं हों, लेकिन हृदय में भक्ति भाव न हो तो ऐसा जीवन निरर्थक बन जाता है।
प्रवाचक ने कहा कि मानव जीवन समस्याओं और चुनौतियों से भरा होता है। मोह-माया के जाल में फंसकर व्यक्ति सांसारिक चिंताओं में उलझा रहता है, जिससे मानसिक शांति भंग होती है। सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से की गई भगवान की भक्ति मोह, माया और चिंता के बंधनों को तोड़ने का कार्य करती है। भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
उन्होंने श्रीकृष्ण के गीता उपदेश का उल्लेख करते हुए कर्मयोग का संदेश दिया। कहा कि गीता का सार यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। कर्म करते समय फल की चिंता छोड़ देने से ही जीवन में सफलता और संतोष की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर आयोजक ओम प्रकाश तिवारी, कमलेश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश तिवारी और प्रेम तिवारी आदि मौजूद रहे।
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प्रवाचक ने कहा कि मानव जीवन समस्याओं और चुनौतियों से भरा होता है। मोह-माया के जाल में फंसकर व्यक्ति सांसारिक चिंताओं में उलझा रहता है, जिससे मानसिक शांति भंग होती है। सच्ची श्रद्धा और निष्काम भाव से की गई भगवान की भक्ति मोह, माया और चिंता के बंधनों को तोड़ने का कार्य करती है। भक्ति से मन को शांति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
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उन्होंने श्रीकृष्ण के गीता उपदेश का उल्लेख करते हुए कर्मयोग का संदेश दिया। कहा कि गीता का सार यह है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने कर्तव्यों का पालन पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिए। कर्म करते समय फल की चिंता छोड़ देने से ही जीवन में सफलता और संतोष की प्राप्ति होती है। इस अवसर पर आयोजक ओम प्रकाश तिवारी, कमलेश तिवारी, विश्वनाथ तिवारी, राजेन्द्र प्रसाद तिवारी, जय प्रकाश तिवारी और प्रेम तिवारी आदि मौजूद रहे।