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Amroha News: तिगरी धाम, ढोलक और गन्ना किसानों का जिक्र कर विकास की नई तस्वीर पेश की
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अमरोहा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसभा में जिले की सांस्कृतिक विरासत, हस्तशिल्प, कृषि और विकास योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि अमरोहा अब पिछड़े जिले की पहचान से बाहर निकल चुका है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की विकास योजनाओं और आधारभूत ढांचे के विस्तार से जनपद नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत सियाराम चंद्र की जय, वृंदावन बिहारी लाल की जय, भारत माता की जय और वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ की। उन्होंने तिगरी धाम और वासुदेव तीर्थ को नमन करते हुए कहा कि यह जनपद महाभारतकालीन आस्था और संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए है। उन्होंने कहा कि अमरोहा के कारीगरों ने अपनी कला और हस्तशिल्प से दुनिया में अलग पहचान बनाई है। कहा कि अमरोहा का तबला और ढोलक एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत देश-विदेश में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। साथ ही यहां के किसान आम की फसल को वैश्विक बाजार तक पहुंचा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मध्य गंगा नहर परियोजना पूरी होने की ओर है और गंगा एक्सप्रेसवे बनने से अमरोहा से दिल्ली, लखनऊ और प्रयागराज की दूरी काफी कम हो जाएगी। सरकार हरिद्वार तक बेहतर संपर्क मार्ग विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन को किसानों को उनकी भूमि का उचित मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। अमरोहा अब विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और आने वाले समय में यह जनपद अपनी नई पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में इस तरह का विकास और औद्योगिक निवेश संभव नहीं था।
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गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की उपलब्धियां गिनाईं
मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच प्रदेश की 29 चीनी मिलें बंद हो गई थीं, जिससे किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल पाता था। वर्तमान सरकार ने चीनी उद्योग को प्राथमिकता देते हुए इसे नई मजबूती दी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हैं और अब तक गन्ना किसानों को 3.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन करने वाला राज्य है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित हो रहे विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे से कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। संवाद
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मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत सियाराम चंद्र की जय, वृंदावन बिहारी लाल की जय, भारत माता की जय और वंदे मातरम् के उद्घोष के साथ की। उन्होंने तिगरी धाम और वासुदेव तीर्थ को नमन करते हुए कहा कि यह जनपद महाभारतकालीन आस्था और संस्कृति की ऐतिहासिक विरासत को संजोए हुए है। उन्होंने कहा कि अमरोहा के कारीगरों ने अपनी कला और हस्तशिल्प से दुनिया में अलग पहचान बनाई है। कहा कि अमरोहा का तबला और ढोलक एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) योजना के तहत देश-विदेश में अपनी विशेष पहचान बना चुके हैं। साथ ही यहां के किसान आम की फसल को वैश्विक बाजार तक पहुंचा रहे हैं।
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उन्होंने कहा कि मध्य गंगा नहर परियोजना पूरी होने की ओर है और गंगा एक्सप्रेसवे बनने से अमरोहा से दिल्ली, लखनऊ और प्रयागराज की दूरी काफी कम हो जाएगी। सरकार हरिद्वार तक बेहतर संपर्क मार्ग विकसित करने की दिशा में भी कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रशासन को किसानों को उनकी भूमि का उचित मुआवजा दिलाने के निर्देश दिए गए हैं। अमरोहा अब विकास के नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है और आने वाले समय में यह जनपद अपनी नई पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में इस तरह का विकास और औद्योगिक निवेश संभव नहीं था।
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गन्ना किसानों और चीनी उद्योग की उपलब्धियां गिनाईं
मुख्यमंत्री ने गन्ना किसानों और चीनी उद्योग का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2007 से 2017 के बीच प्रदेश की 29 चीनी मिलें बंद हो गई थीं, जिससे किसानों को समय पर गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं मिल पाता था। वर्तमान सरकार ने चीनी उद्योग को प्राथमिकता देते हुए इसे नई मजबूती दी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस समय 122 चीनी मिलें संचालित हैं और अब तक गन्ना किसानों को 3.23 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया जा चुका है। गन्ने का राज्य परामर्शित मूल्य 300 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 400 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश आज देश में सर्वाधिक गन्ना, चीनी और एथेनॉल उत्पादन करने वाला राज्य है तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित हो रहे विश्वस्तरीय आधारभूत ढांचे से कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। संवाद