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गोसंरक्षण में जनसहभागिता बढ़ाने का आह्वान, सरकार पूरी संवेदनशीलता से कर रही काम : महेश शुक्ल
Wed, 08 Jul 2026 02:27 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Wed, 08 Jul 2026 02:27 AM IST
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अमरोहा। उत्तर प्रदेश गोसेवा आयोग के उपाध्यक्ष महेश कुमार शुक्ल ने कहा कि निराश्रित गोवंश के संरक्षण और संवर्धन को लेकर प्रदेश सरकार पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। उन्होंने समाज से गाेशालाओं से गाय अपनाकर उनका पालन-पोषण करने की अपील करते हुए कहा कि गौ संरक्षण केवल सरकार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। यह बात उन्होंने मंगलवार को कलक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि परिवार, ग्राम और समाज की मजबूत व्यवस्था ही समृद्धि का आधार है तथा किसानों की खुशहाली के बिना प्रदेश और देश का समग्र विकास संभव नहीं है। सरकार गोसेवा को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व के रूप में देख रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 50 रुपये की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 1.67 लाख से अधिक गोवंश इच्छुक गोपालकों को सौंपे जा चुके हैं तथा सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। बताया कि गोशालाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 5446 गोशालाओं में 7592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। उन्होंने अमरोहा जनपद की सराहना करते हुए कहा कि यहां 26 गौ-आश्रय स्थलों में 8776 गोवंश संरक्षित हैं। इसके अलावा 850 प्रगतिशील गोपालकों ने सहभागिता योजना के तहत 1279 गोवंश को अपनाकर जनसहभागिता का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत गोवंश की सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। गौ संरक्षण को लेकर भ्रामक प्रचार करने वाले तत्वों के खिलाफ भी प्रशासन सतर्क है और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
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उन्होंने कहा कि परिवार, ग्राम और समाज की मजबूत व्यवस्था ही समृद्धि का आधार है तथा किसानों की खुशहाली के बिना प्रदेश और देश का समग्र विकास संभव नहीं है। सरकार गोसेवा को केवल प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि मानवीय, सामाजिक और सांस्कृतिक उत्तरदायित्व के रूप में देख रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 7700 से अधिक गौ-आश्रय स्थल संचालित हैं, जहां 16 लाख से अधिक निराश्रित गोवंश का संरक्षण किया जा रहा है। गोवंश के भरण-पोषण के लिए प्रति पशु प्रतिदिन 50 रुपये की सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 1.67 लाख से अधिक गोवंश इच्छुक गोपालकों को सौंपे जा चुके हैं तथा सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों में भेजी जा रही है। बताया कि गोशालाओं की निगरानी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश की 5446 गोशालाओं में 7592 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनके माध्यम से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है। उन्होंने अमरोहा जनपद की सराहना करते हुए कहा कि यहां 26 गौ-आश्रय स्थलों में 8776 गोवंश संरक्षित हैं। इसके अलावा 850 प्रगतिशील गोपालकों ने सहभागिता योजना के तहत 1279 गोवंश को अपनाकर जनसहभागिता का बेहतर उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश गोवध निवारण अधिनियम के तहत गोवंश की सुरक्षा को लेकर सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति लागू है। गौ संरक्षण को लेकर भ्रामक प्रचार करने वाले तत्वों के खिलाफ भी प्रशासन सतर्क है और किसी भी प्रकार की अनियमितता मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाती है।
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