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Amroha News: होटल-ढाबों में घरेलू गैस का इस्तेमाल बढ़ा, शहर में बुकिंग अब 35 दिन बाद
संवाद न्यूज एजेंसी, अमरोहा
Updated Fri, 27 Mar 2026 01:16 AM IST
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अमरोहा। ईरान और इस्राइल युद्ध के असर से स्थानीय लोग गैस आपूर्ति में परेशान नजर आ रहे हैं। कामर्शियल गैस सिलिंडर की कमी के कारण होटल और ढाबा संचालक अब घरेलू सिलिंडरों का सहारा लेने को मजबूर हैं। इसका असर सड़क निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर भी पड़ रहा है, जिनमें गैस की आवश्यकता होती है।
पूर्ति विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जनपद में गैस की किसी प्रकार की किल्लत नहीं है और बुकिंग के अनुसार सभी को सिलिंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हालांकि, घरेलू गैस की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है और उपभोक्ताओं को अब करीब 35 दिन बाद ही अगली बुकिंग कराने की अनुमति मिल रही है। गांवों में यह अवधि 45 दिन है। अगर आपने बृहस्पतिवार को सिलिंडर लिया तो फिर आप दूसरा सिलिंडर 35 दिन बाद ही बुक कर पाएंगे। जिन लोगों ने अपनी ई-केवाईसी नहीं कराई है, उन्हें पहले इसे पूरा करना होगा। इसके बिना सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। बृहस्पतिवार को घरेलू सिलिंडर का स्टॉक 14,494 था, जिसमें से 6290 का उठान हुआ और 8204 सिलिंडर शेष रहे। उधर, कामर्शियल सिलिंडर की कमी से व्यवसायिक प्रभावित हो रहे हैं। कई होटल और ढाबा संचालक विकल्प के तौर पर कोयला और लकड़ी का प्रयोग कर रहे हैं। सिलिंडर मिलने की प्रक्रिया में बुकिंग, ओटीपी और वाउचर जैसे कई कदम होने के कारण आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। गांवों में तो लोग अब चूल्हे का सहारा ले रहे हैं, जबकि शहर में अधिकांश लोग खाना बनाने के लिए गैस पर ही निर्भर हैं। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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पूर्ति विभाग के अधिकारियों का दावा है कि जनपद में गैस की किसी प्रकार की किल्लत नहीं है और बुकिंग के अनुसार सभी को सिलिंडर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। हालांकि, घरेलू गैस की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है और उपभोक्ताओं को अब करीब 35 दिन बाद ही अगली बुकिंग कराने की अनुमति मिल रही है। गांवों में यह अवधि 45 दिन है। अगर आपने बृहस्पतिवार को सिलिंडर लिया तो फिर आप दूसरा सिलिंडर 35 दिन बाद ही बुक कर पाएंगे। जिन लोगों ने अपनी ई-केवाईसी नहीं कराई है, उन्हें पहले इसे पूरा करना होगा। इसके बिना सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पाएंगे। बृहस्पतिवार को घरेलू सिलिंडर का स्टॉक 14,494 था, जिसमें से 6290 का उठान हुआ और 8204 सिलिंडर शेष रहे। उधर, कामर्शियल सिलिंडर की कमी से व्यवसायिक प्रभावित हो रहे हैं। कई होटल और ढाबा संचालक विकल्प के तौर पर कोयला और लकड़ी का प्रयोग कर रहे हैं। सिलिंडर मिलने की प्रक्रिया में बुकिंग, ओटीपी और वाउचर जैसे कई कदम होने के कारण आम लोगों की परेशानियां बढ़ गई हैं। गांवों में तो लोग अब चूल्हे का सहारा ले रहे हैं, जबकि शहर में अधिकांश लोग खाना बनाने के लिए गैस पर ही निर्भर हैं। ऐसे में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
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