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Auraiya News: एबीसीडीई के मंत्र से कंट्रोल कराई जा रही डायबिटीज
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- मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर सुगर रोगियों को दे रहे मंत्र के जरिए परामर्श
- डायबिटीज की चिंता लेकर पहुंच रहे मरीजों के स्वास्थ्य पर लगातार रखी जा रही नजर
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। डायबिटीज की बीमारी साइलेंट किलर के तौर पर जानी जाती है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में जाने अनजाने पहुंचने वाले मरीजों की जांच में निकल रही डायबिटीज को लेकर विशेष जोर देना शुरू किया गया है। इसके लिए डॉक्टर सुगर के रोगियों को एबीसीडीई का मंत्र दे रहे हैं। इस मंत्र के दैनिक जीवन में प्रयोग के जरिए मरीजों में आने वाले सुधार पर भी नजर रखी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि 30 की उम्र के बाद हर साल डायबिटीज की जांच जरूरी है। हर 6 में से 1 व्यक्ति डायबिटीज (मधुमेह) की चपेट में है। इसे ''''खामोश बीमारी'''' कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। हालांकि, सही समय पर सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। भोजन से बनने वाले ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम इंसुलिन हार्मोन करता है। इंसुलिन न बनने (टाइप-1) या सही से काम न करने (टाइप-2) पर रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बिना कारण वजन घटना, थकान और घाव देर से भरना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके बचाव के लिए दवा के साथ ही एबीसीडीई की एक पद्धति भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए सुगर रोगियों के लिए कारगर है।
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ये है एबीसीडीई
ए- आहार: थाली में आधा हिस्सा हरी सब्जियां/सलाद, एक चौथाई प्रोटीन व एक चौथाई अनाज रखें। मीठे और मैदे से परहेज करें।
बी- बॉडी: रोजाना 30 मिनट तेज टहलें या योग करें।
सी- चेकअप: समय पर दवाएं लें और हर तीन महीने में जांच कराएं।
डी- डी-स्ट्रेस: तनाव मुक्त रहें और 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।ई- वजन नियंत्रण: केवल 5 प्रतिशत वजन घटाकर भी शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है।
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वर्जन-- --
मेडिकल कॉलेज में सुगर रोगियों की लगातार स्क्रीनिंग हो रही है। लैब में निशुल्क जांचें हो रही हैं। सुगर को लेकर एबीसीडीई आधारित प्रयोग काफी कारगर है। सुगर रोगियों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव भी आ रहे हैं।-डॉ. मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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- डायबिटीज की चिंता लेकर पहुंच रहे मरीजों के स्वास्थ्य पर लगातार रखी जा रही नजर
संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। डायबिटीज की बीमारी साइलेंट किलर के तौर पर जानी जाती है। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में जाने अनजाने पहुंचने वाले मरीजों की जांच में निकल रही डायबिटीज को लेकर विशेष जोर देना शुरू किया गया है। इसके लिए डॉक्टर सुगर के रोगियों को एबीसीडीई का मंत्र दे रहे हैं। इस मंत्र के दैनिक जीवन में प्रयोग के जरिए मरीजों में आने वाले सुधार पर भी नजर रखी जा रही है।
मेडिकल कॉलेज के सीएमएस डॉ. पवन कुमार शर्मा ने बताया कि 30 की उम्र के बाद हर साल डायबिटीज की जांच जरूरी है। हर 6 में से 1 व्यक्ति डायबिटीज (मधुमेह) की चपेट में है। इसे ''''खामोश बीमारी'''' कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण आसानी से नजर नहीं आते। हालांकि, सही समय पर सही जानकारी और थोड़ी सी सावधानी से इसे पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है। भोजन से बनने वाले ग्लूकोज को कोशिकाओं तक पहुंचाने का काम इंसुलिन हार्मोन करता है। इंसुलिन न बनने (टाइप-1) या सही से काम न करने (टाइप-2) पर रक्त में शर्करा का स्तर बढ़ जाता है। बार-बार पेशाब आना, अत्यधिक प्यास लगना, बिना कारण वजन घटना, थकान और घाव देर से भरना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके बचाव के लिए दवा के साथ ही एबीसीडीई की एक पद्धति भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए सुगर रोगियों के लिए कारगर है।
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ये है एबीसीडीई
ए- आहार: थाली में आधा हिस्सा हरी सब्जियां/सलाद, एक चौथाई प्रोटीन व एक चौथाई अनाज रखें। मीठे और मैदे से परहेज करें।
बी- बॉडी: रोजाना 30 मिनट तेज टहलें या योग करें।
सी- चेकअप: समय पर दवाएं लें और हर तीन महीने में जांच कराएं।
डी- डी-स्ट्रेस: तनाव मुक्त रहें और 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।ई- वजन नियंत्रण: केवल 5 प्रतिशत वजन घटाकर भी शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है।
वर्जन
मेडिकल कॉलेज में सुगर रोगियों की लगातार स्क्रीनिंग हो रही है। लैब में निशुल्क जांचें हो रही हैं। सुगर को लेकर एबीसीडीई आधारित प्रयोग काफी कारगर है। सुगर रोगियों के स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव भी आ रहे हैं।-डॉ. मुकेशवीर सिंह, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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