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Azamgarh News: जिला महिला अस्पताल में रोज हो रहे 12 प्रसव, तीन में हीमोग्लोबिन कम
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महिला अस्पताल में महिला के स्वास्थ्य की जांच करतीं डॉक्टर। संवाद
- फोटो : संवाद
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बलरामपुर। गर्भवती महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) प्रसव को लगातार जोखिम भरा बना रही है। जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन 10 से 12 प्रसव हो रहे हैं, इनमें से रोजाना तीन से चार मामलों में महिलाओं का हीमोग्लोबिन स्तर चिंताजनक पाया जा रहा है।
कई महिलाओं में हीमोग्लोबिन 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम है, इसके चलते उन्हें उच्च जोखिम वाली गर्भवती की श्रेणी में रखा गया है। महिला अस्पताल में अगर 473 महिलाओं के हीमोग्लोबिन की जांच की जा रही है तो इसमें से 38 महिलों में सात ग्राम से कम खून मिल रहा है।
चिकित्सकों के अनुसार, एनीमिया के साथ-साथ गर्भवतियों में वजन कम होने की शिकायत भी अधिक देखने को मिल रही है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों को चुनौती मिल रही है। खून की कमी के कारण प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, जटिलताएं और नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क खून जांच, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का वितरण, पोषण संबंधी परामर्श और जागरूकता अभियान शामिल हैं। साथ ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत गर्भवतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके बावजूद अस्पताल में प्रतिदिन एनीमिया से ग्रसित प्रसूताओं के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण से ही नियमित जांच कराना और संतुलित आहार जैसे पालक, अनार, चुकंदर, दालें और सूखे मेवे का सेवन करने से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. विनय सिंह यादव ने अपील की है कि गर्भवती महिलाएं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं और विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाएं, ताकि सुरक्षित और स्वस्थ प्रसव सुनिश्चित हो सके।
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कई महिलाओं में हीमोग्लोबिन 10 ग्राम प्रति डेसीलीटर से कम है, इसके चलते उन्हें उच्च जोखिम वाली गर्भवती की श्रेणी में रखा गया है। महिला अस्पताल में अगर 473 महिलाओं के हीमोग्लोबिन की जांच की जा रही है तो इसमें से 38 महिलों में सात ग्राम से कम खून मिल रहा है।
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चिकित्सकों के अनुसार, एनीमिया के साथ-साथ गर्भवतियों में वजन कम होने की शिकायत भी अधिक देखने को मिल रही है, जिससे मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के प्रयासों को चुनौती मिल रही है। खून की कमी के कारण प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, जटिलताएं और नवजात शिशु के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
इस समस्या से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इनमें गर्भवती महिलाओं के लिए निःशुल्क खून जांच, आयरन-फोलिक एसिड की गोलियों का वितरण, पोषण संबंधी परामर्श और जागरूकता अभियान शामिल हैं। साथ ही प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान और एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत गर्भवतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इसके बावजूद अस्पताल में प्रतिदिन एनीमिया से ग्रसित प्रसूताओं के मामले सामने आ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि गर्भावस्था के शुरुआती चरण से ही नियमित जांच कराना और संतुलित आहार जैसे पालक, अनार, चुकंदर, दालें और सूखे मेवे का सेवन करने से इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इस संबंध में सीएमएस डॉ. विनय सिंह यादव ने अपील की है कि गर्भवती महिलाएं समय-समय पर स्वास्थ्य जांच कराएं और विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का लाभ उठाएं, ताकि सुरक्षित और स्वस्थ प्रसव सुनिश्चित हो सके।
