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Azamgarh News: पीजीआई चक्रपानपुर में वारदात के बाद सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय में कर रहे थे रेकी

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Mon, 20 Apr 2026 01:00 AM IST
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After the incident at PGI Chakrapanpur, they were doing recce at Suheldev State University.
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आजमगढ़। पीजीआई चक्रपानपुर में हुई चोरी की घटना के खुलासे में पुलिस ने अंतरराज्यीय चोर गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह के एक सदस्य की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह अलग-अलग राज्यों में सरकारी संस्थानों और उनके आवासीय परिसरों को निशाना बनाता रहा है। पीजीआई चक्रपानपुर में घटना के बाद अब यह महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय में चोरी की घटना को अंजाम देने के लिए रेकी कर रहे थे।
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एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने बताया कि मुठभेड़ में गिरफ्तार मध्य प्रदेश के बाग थाना क्षेत्र के घोटियादेव गांव निवासी संजय भील उर्फ संजू ने पूछताछ में बताया कि वारदात के दौरान मास्क और ग्लब्स पहनकर और हथियारों के साथ चोरी करते थे। विरोध करने पर जान से मारने तक की धमकी देते थे। गिरोह अब तक रायबरेली, झांसी, पटना व अन्य स्थानों पर मेडिकल कॉलेजों में चोरी की घटनाओं को अंजाम दे चुका है। पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी चोरी के आभूषणों की पहचान छिपाने के लिए उन्हें पिघलाकर सोने की सिल्ली बना देते थे, जिससे पहचान करना मुश्किल हो जाता था। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के पास से तमंचा, कारतूस, करीब 10 ग्राम व 23 ग्राम की सोने की सिल्ली और 40 हजार रुपये नकद बरामद किए हैं। जांच में यह भी पता चला कि गिरोह दोबारा सक्रिय होकर महाराजा सुहेलदेव राज्य विश्वविद्यालय में चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए रेकी कर रहा था, लेकिन पुलिस ने समय रहते कार्रवाई कर उनकी योजना को विफल कर दिया। फिलहाल अन्य भागे हुए आरोपियों की तलाश जारी है। एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने बताया कि जहानागंज थाने में शातिर आरोपी संजय भील उर्फ संजू के खिलाफ तीन अलग-अलग मामलों में बीएनएस व आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है।
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ऐसे घटना को देते थे अंजाम :
एसपी सिटी मधुबन कुमार सिंह ने बताया कि पूछताछ में आरोपी संजय भील ने बताया कि मध्य प्रदेश के अलीराजपुर के बोरी थाना क्षेत्र के कदवाल बड़ी निवासी अनिल भील, धार जिला के टांडा थाना क्षेत्र के चामझर निवासी भारत व टांडा थाना क्षेत्र के ककड़वा गांव निवासी दिनेश के साथ मिलकर एक संगठित गिरोह के रूप में काम करता है। यह गिरोह पहले विभिन्न राज्यों में सरकारी संस्थानों और आवासीय परिसरों की रेकी करता है। इसके बाद सुनियोजित तरीके से रात के समय ताला तोड़कर चोरी की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है। चोरी के बाद गिरोह आभूषणों की पहचान छिपाने के लिए उन्हें पिघलाकर सिल्ली में बदल देता है, जिससे उन्हें आसानी से बेचा जा सके और पुलिस के लिए उनकी पहचान करना कठिन हो जाए।
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