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Azamgarh News: चार जनपदों की आस्था का केंद्र भुवनेश्वर महादेव धाम बेलवाई
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भुवनेश्वर महादेव शिवधाम बेलवाई। संवाद
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पवई। जौनपुर, आजमगढ़, अंबेडकरनगर और सुल्तानपुर की सीमाओं के निकट स्थित भुवनेश्वर महादेव शिवधाम बेलवाई पूर्वांचल के प्रमुख प्राचीन शिवालयों में शामिल है। यह मंदिर वर्षों से शिवभक्तों की अटूट आस्था का केंद्र बना है। वर्षभर यहां श्रद्धालुओं का आवागमन रहता है, लेकिन सावन माह, महाशिवरात्रि और प्रत्येक सोमवार को मंदिर में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ता है। हजारों श्रद्धालु पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं।
पुजारी चंद्रेश गिरी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार भुवनेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है। जनश्रुति है कि जिस स्थान पर वर्तमान में शिवलिंग विराजमान है, वहां कभी भूमि विवाद के दौरान एक ब्राह्मण की मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी सती होने के लिए चिता पर बैठीं, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी चिता में आग नहीं लगी। बताया जाता है कि महिला ने कहा कि इस स्थान के नीचे किसी दिव्य शक्ति का वास है। स्थान बदलने के बाद चिता प्रज्ज्वलित हुई। इसके बाद जब उस स्थल की खुदाई की गई तो वहां प्राचीन शिवलिंग मिला। तभी से यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई और समय के साथ भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर परिसर में सती माता का चबूतरा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा हनुमान जी, दुर्गा माता, लक्ष्मी-नारायण, राधा-कृष्ण और मां काली समेत अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी परिसर में स्थापित हैं। यहां बने पक्के जलाशय में स्नान करने के बाद श्रद्धालु भगवान भुवनेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। सावन में बाबा धाम जाने वाले अनेक कांवरिये भी अपनी यात्रा की शुरुआत भुवनेश्वर महादेव मंदिर से करते हैं। क्षेत्र के दिलीप मोदनवाल, डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. फूलचंद सिंह, डॉ. शेषनारायण दुबे, योगीनाथ पांडेय और नंदन सिंह आदि ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के भी इंतजाम किए जाते हैं। चार जनपदों की सीमाओं के निकट स्थित यह प्राचीन शिवधाम आज धार्मिक आस्था, लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भुवनेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन करते हैं तथा सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं।
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पुजारी चंद्रेश गिरी ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार भुवनेश्वर महादेव मंदिर का इतिहास कई शताब्दियों पुराना है। जनश्रुति है कि जिस स्थान पर वर्तमान में शिवलिंग विराजमान है, वहां कभी भूमि विवाद के दौरान एक ब्राह्मण की मृत्यु हो गई थी। उनकी पत्नी सती होने के लिए चिता पर बैठीं, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी चिता में आग नहीं लगी। बताया जाता है कि महिला ने कहा कि इस स्थान के नीचे किसी दिव्य शक्ति का वास है। स्थान बदलने के बाद चिता प्रज्ज्वलित हुई। इसके बाद जब उस स्थल की खुदाई की गई तो वहां प्राचीन शिवलिंग मिला। तभी से यहां पूजा-अर्चना शुरू हुई और समय के साथ भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया। मंदिर परिसर में सती माता का चबूतरा आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। इसके अलावा हनुमान जी, दुर्गा माता, लक्ष्मी-नारायण, राधा-कृष्ण और मां काली समेत अन्य देवी-देवताओं के मंदिर भी परिसर में स्थापित हैं। यहां बने पक्के जलाशय में स्नान करने के बाद श्रद्धालु भगवान भुवनेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। सावन में बाबा धाम जाने वाले अनेक कांवरिये भी अपनी यात्रा की शुरुआत भुवनेश्वर महादेव मंदिर से करते हैं। क्षेत्र के दिलीप मोदनवाल, डॉ. राजेंद्र सिंह, डॉ. फूलचंद सिंह, डॉ. शेषनारायण दुबे, योगीनाथ पांडेय और नंदन सिंह आदि ने बताया कि सावन के प्रत्येक सोमवार और महाशिवरात्रि पर मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटती है। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश सहित अन्य व्यवस्थाएं की जाती हैं। भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के भी इंतजाम किए जाते हैं। चार जनपदों की सीमाओं के निकट स्थित यह प्राचीन शिवधाम आज धार्मिक आस्था, लोकविश्वास और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भुवनेश्वर महादेव के दर्शन और पूजन करते हैं तथा सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ण होने की कामना करते हैं।
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