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Azamgarh News: जंक फूड का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों को बना रहा मोटापे का शिकार, याददाश्त भी हो सकती है कमजोर

Thu, 20 Aug 2026 01:12 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 20 Aug 2026 01:12 AM IST
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Excessive consumption of junk food is making children prone to obesity; it can also impair memory.
मंडलीय अस्पताल में बच्चे का इलाज करते बाल रोग विशेषज्ञ। संवाद
पिज्जा, बर्गर, चाउमीन और अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थों का बढ़ता चलन बच्चों और युवाओं की सेहत पर भारी पड़ रहा है। जिला अस्पताल के बाह्य रोगी विभाग में जांच के दौरान रोजाना 50 से अधिक ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं, जो गलत खानपान और खराब जीवनशैली से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित हैं।
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जांच में करीब 10 प्रतिशत मरीजों में यकृत में अतिरिक्त वसा जमा होने की पुष्टि हो रही है। बाल रोग चिकित्सक डॉ. एसके विमल के अनुसार, प्रतिदिन 25 से 30 बच्चे जंक फूड का ज्यादा सेवन करने वाले ओपीडी में आ रहे हैं।
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जंक फूड का ज्यादा इस्तेमाल बच्चों को मोटापे की तरफ धकेल रहा है। साथ ही इनकी यादाश्त भी आगे कमजोर हो सकती है। कई मरीजों को लंबे समय तक दवा के साथ खानपान और जीवनशैली में बदलाव की सलाह देनी पड़ रही है।
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चिकित्सक का कहना है कि आधुनिक जीवनशैली और खानपान की गलत आदतें युवाओं में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का प्रमुख कारण बन रही हैं। शारीरिक गतिविधियां कम होने से भी समस्या बढ़ रही है। बच्चे घंटों मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य स्क्रीन के सामने समय बिताते हैं और पौष्टिक भोजन से दूर होते जा रहे हैं।
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पिज्जा, बर्गर और चाउमीन का बढ़ता चलन कम उम्र में बढ़ा रहा मोटापा
फिजिशियन डॉ. आरके कुशवाहा बताते हैं कि शारीरिक गतिविधियों की कमी, मोटापा, नींद की कमी और तनाव भी बच्चों व युवाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। पहले उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसी बीमारियां बढ़ती उम्र में देखने को मिलती थीं, लेकिन अब 30 से 45 वर्ष की उम्र में भी इनके मरीज सामने आ रहे हैं। जंक फूड में नमक, चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा की मात्रा अधिक होती है। इसके नियमित सेवन से मोटापा, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, रक्त में वसा की अधिकता और हृदय रोग का खतरा बढ़ सकता है।
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तेज बुखार और झटके की शिकायत पर बच्ची भर्ती
बलरामपुर से आई पांच वर्षीय बच्ची को एक सप्ताह से बुखार था। दो दिन से तेज बुखार के साथ झटके आने लगे। स्थानीय स्तर पर उपचार के बाद भी सुधार नहीं हुआ। जांच में हीमोग्लोबिन कम मिला। तेज बुखार और झटके की शिकायत पर बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. एसके विमल ने बच्ची को तत्काल पीआईसीयू में भर्ती कराया। चिकित्सक ने बताया कि मौसम में बदलाव के कारण बुखार से पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ रही है।

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फिजिशियन डॉ. आरके कुशवाहा की सलाह
पौष्टिक आहार का सेवन करें और बच्चों पर विशेष ध्यान दें।
अंकुरित अनाज और हरी पत्तेदार सब्जियों का सेवन करें।
जंक फूड और फास्ट फूड का सेवन बंद करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और स्वच्छ पानी ही इस्तेमाल करें।
योग और व्यायाम को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाएं।
बिना जांच और चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रकार की दवा न लें।
----वर्जन
समय रहते खानपान और जीवनशैली में सुधार कर इन बीमारियों से बचा जा सकता है। गंभीर स्थिति में यकृत को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। अस्पताल में मरीजों को इलाज के साथ चिकित्सकीय परामर्श दिया जा रहा है। इस समय सर्दी, जुकाम, वायरल बुखार के सबसे अधिक मरीज आ रहे हैं। -डॉ. सतीशचंद्र कन्नौजिया, एसआईसी।
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