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Azamgarh News: महंगाई की मार, 4000 रुपये बीघा तक पहुंची गेहूं की कटाई

Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Thu, 09 Apr 2026 12:20 AM IST
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Inflation hits wheat harvesting prices, reaching Rs 4,000 per bigha
मेंहनगर के गोपालपुर गांव में खेत में गेंहू की खड़ी फसल और रखा बोझ। संवाद
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आजमगढ़। जिले में करीब 50 फीसदी गेहूं की कटाई अब कंबाइन मशीन से ही हो रही है। वर्तमान में गेहूं की कटाई चल रही है। हाल यह है कि गेहूं की कटाई के लिए एक तो मजदूर नहीं मिल रहे, दूसरे मिल भी रहे तो इतनी डिमांड की किसानों की हिम्मत छूट जा रही है। कटाई के लिए तीन से चार हजार रुपये प्रति बीघा मांगा जा रहा है। इसके बाद किसानों को गेहूं की मड़ाई भी करानी है।
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लाटघाट प्रतिनिधि के अनुसार अजमतगढ़ विकास खंड के जमसर गांव निवासी रामाश्रय राय ने बताया कि खेती अब मजदूरों के सहारे नहीं हो पाएगी। व्यवस्था मशीनीकरण का नहीं है तो खेती करना दूभर हो जाएगा। बताया कि प्रति बीघा गेहूं की फसल के लिए जोताई से मड़ाई तक 12 हजार से अधिक खर्च हो जा रहा है। 8 क्विंटल के करीब गेहूं की पैदावार होती है। बड़ी मेहनत के बाद गेहूं घर पहुंचता है। अब गेहूं की कटाई के लिए ठेके पर मजदूर तीन से चार हजार रुपये तक की मांग कर रहे हैं। उसके बाद मड़ाई बाकी ही है। ऐसी हालत में कंबाइन लगाकर ही गेहूं की कटाई संभव हो पाता है।
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हरैया विकास खंड के बरड़ीहा निवासी श्रीकांत सिंह ने बताया कि गेहूं किसान की मुख्य फसल है। गेहूं की बोआई, कटाई और मड़ाई, खाद-बीज और दवाई को मिलाकर करीब 12 से 13 हजार रुपये प्रति बीघा खर्च पड़ जा रहा है। गेहूं की सिंचाई के लिए निजी ट्यूबवेल नहीं है और पंपिंग सेट से करनी है तो दो हजार, दो हजार खाद, 1500 बीज, तीन हजार जोताई और कंबाइन से कटाई और भूसा बनवाई कराना है तो 4500 रुपये की लागत पड़ जा रही है। इतने खर्च के बाद किसी तरह गेहूं घर में जा पाता है। किसान अपनी पूरी कमाई खेती में लगा रहा है।
ये है कंबाइन हार्वेस्टर -आधुनिक कृषि में गेहूँ की कटाई, थ्रेशिंग (मड़ाई) और सफाई एक साथ करने का सबसे तेज, किफायती और प्रभावी साधन है। यह कम समय में, लगभग 700 रुपये प्रति बीघा (क्षेत्र के अनुसार भिन्न) की लागत में फसल काटता है। इससे मजदूरी की बचत होती है और बेमौसम बारिश के जोखिम से भी सुरक्षा मिलती है।
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