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जोखिम में मासूम : 206 अतिकुपोषित बच्चों में से सिर्फ 15 को मिल रहा इलाज
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जिला अस्पताल के कुपोषण वार्ड में भर्ती बच्चे। संवाद
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आजमगढ़। जिले में नौनिहालों को सेहतमंद बनाने और कुपोषण को मिटाने के सरकारी दावों की पोल खुल गई है। कुपोषित बच्चों के उपचार और देखभाल को लेकर गंभीर और संवेदनशील लापरवाही सामने आई है। अप्रैल माह में जिलेभर में 206 सैम (अतिकुपोषित) और 1851 मैम (कुपोषित) बच्चों की पहचान की गई, लेकिन इनमें से सिर्फ 15 सैम बच्चों को ही पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जा सका। शेष 191 अत्यंत गंभीर बच्चे प्रशासनिक उदासीनता के कारण बिना इलाज के रहने को मजबूर हैं। वहीं नियम और मेडिकल गाइडलाइन कहती है कि ‘’सैम’’ श्रेणी में आने वाले बच्चों की जान को सीधा खतरा होता है और उन्हें तत्काल विशेष देखभाल व चिकित्सा की जरूरत होती है।
जिले में चिह्नित अधिकांश बच्चे अब भी एनआरसी की सुविधा से दूर हैं। जानकारों का कहना है कि समय पर उपचार न मिलने से अतिकुपोषित बच्चों में संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, अभिभावकों की आर्थिक परेशानी और विभागीय उदासीनता के कारण बच्चों को केंद्र तक नहीं लाया जा रहा है। कई स्थानों पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निगरानी व्यवस्था भी कमजोर बताई जा रही है।
माहवार कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। इसमें गंभीर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जाता है और अन्य बच्चों को उनके घर पर ही पोषण संबंधी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दलिया, चने की दाल, सोयाबीन का तेल आदि दिया जाता है। यदि कहीं नहीं मिलता है तो अभिभावक इसकी शिकायत करें। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - हेमंत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, आजमगढ़।
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जिले में चिह्नित अधिकांश बच्चे अब भी एनआरसी की सुविधा से दूर हैं। जानकारों का कहना है कि समय पर उपचार न मिलने से अतिकुपोषित बच्चों में संक्रमण और गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी, अभिभावकों की आर्थिक परेशानी और विभागीय उदासीनता के कारण बच्चों को केंद्र तक नहीं लाया जा रहा है। कई स्थानों पर आशा और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की निगरानी व्यवस्था भी कमजोर बताई जा रही है।
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माहवार कुपोषित व अति कुपोषित बच्चों को चिह्नित किया जाता है। इसमें गंभीर बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जाता है और अन्य बच्चों को उनके घर पर ही पोषण संबंधी सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से दलिया, चने की दाल, सोयाबीन का तेल आदि दिया जाता है। यदि कहीं नहीं मिलता है तो अभिभावक इसकी शिकायत करें। जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। - हेमंत सिंह, जिला कार्यक्रम अधिकारी, आजमगढ़।