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Azamgarh News: आठवीं मुहर्रम पर निकले मातमी जुलूस
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सरायमीर के निकामुद्दीनपुर में आठवीं मोहर्रम के जुलूस में मातम करती अंजुमने। संवाद
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सरायमीर। आठवीं मुहर्रम पर सरायमीर सहित निकामुद्दीनपुर, रसूलपुर ओहदपुर, फतेहपुर, खपड़ागांव में अकीदत, श्रद्धा और गमगीन माहौल के बीच मातमी जुलूस व शब्बेदारी का आयोजन किया गया जिसमें सैकड़ों की संख्या में अकीदतमंदों ने शिरकत कर हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदाने कर्बला को खिराज-ए-अकीदत पेश किया।
जुलूस निर्धारित मार्गों से होता हुआ देर रात इमामबाड़े पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
निकामुद्दीनपुर में जुलूस की शुरुआत इमाम चौक से मजलिस के आयोजन से हुई, जिसमें अकबरपुर से आए मौलाना सैयद आसिफ रजा ने हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी और उनके मिशन को बयान किया।
इसके बाद अंजुमनों द्वारा नौहाख्वानी और मातम किया गया। या हुसैन और या अब्बास की सदाओं से वातावरण गूंज उठा। जुलूस में अंजुमन जाफरिया रजिस्टर्ड मुस्तफाबाद जलालपुर, अंजुमन सज्जादिया नगपुर जलालपुर, अंजुमन फैजाने अबू तुराब मुबारकपुर ने नौहा मातम किया। इसी क्रम में ग्राम रसूलपुर बर्वा में अंजुमन जाफरिया के तत्वावधान में आठवीं मुहर्रम का जुलूस निकला।
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पहली मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद तहजीबुल हसन लखनऊ ने कहा कि मुहर्रम का महीना त्याग, सब्र, इंसाफ और मानवता की रक्षा का संदेश देता है। जुलूस में अंजुमन मासूमिया जलालपुर, अंजुमन हुसैनिया उस्मानपुर और अंजुमन जाफरिया कोपागंज मऊ ने नौहा मातम किया।
खपड़ागांव में मौलाना हुसैन हैदर ने तकरीर करते हुए कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने परिवार और साथियों के साथ ऐसी महान कुर्बानी पेश की, जिसकी मिसाल इतिहास में नहीं मिलती।
इसी क्रम में ग्राम कस्बा फतेहपुर में शब्बेदारी का आयोजन किया गया, जहां पर कर्बला की शहादत को याद करके गम का इजहार किया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद फरमान हैदर ने हजरत अली अकबर (अ.स.) की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि वे युवाओं के लिए आदर्श हैं। उन्होंने कम उम्र में ही बहादुरी, ईमानदारी और अपने इमाम के प्रति वफादारी का सर्वोच्च उदाहरण पेश किया।
मजलिस के बाद अंजुमन अब्बासिया मिजवां अंजुमन रौनक इस्लाम जलालपुर, अंजुमन दरबारे हुसैनी लेडूवावर, अंजुमन हुसैनिया पुरंदरपुर, अंजुमन इमामिया बिलहरी इमाम अली ने नौहा मातम किया।
जुलूस निर्धारित मार्गों से होता हुआ देर रात इमामबाड़े पर पहुंचकर समाप्त हुआ।
निकामुद्दीनपुर में जुलूस की शुरुआत इमाम चौक से मजलिस के आयोजन से हुई, जिसमें अकबरपुर से आए मौलाना सैयद आसिफ रजा ने हजरत इमाम हुसैन (अ.स.) की कुर्बानी और उनके मिशन को बयान किया।
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इसके बाद अंजुमनों द्वारा नौहाख्वानी और मातम किया गया। या हुसैन और या अब्बास की सदाओं से वातावरण गूंज उठा। जुलूस में अंजुमन जाफरिया रजिस्टर्ड मुस्तफाबाद जलालपुर, अंजुमन सज्जादिया नगपुर जलालपुर, अंजुमन फैजाने अबू तुराब मुबारकपुर ने नौहा मातम किया। इसी क्रम में ग्राम रसूलपुर बर्वा में अंजुमन जाफरिया के तत्वावधान में आठवीं मुहर्रम का जुलूस निकला।
पहली मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद तहजीबुल हसन लखनऊ ने कहा कि मुहर्रम का महीना त्याग, सब्र, इंसाफ और मानवता की रक्षा का संदेश देता है। जुलूस में अंजुमन मासूमिया जलालपुर, अंजुमन हुसैनिया उस्मानपुर और अंजुमन जाफरिया कोपागंज मऊ ने नौहा मातम किया।
खपड़ागांव में मौलाना हुसैन हैदर ने तकरीर करते हुए कहा कि इमाम हुसैन (अ.स.) ने अपने परिवार और साथियों के साथ ऐसी महान कुर्बानी पेश की, जिसकी मिसाल इतिहास में नहीं मिलती।
इसी क्रम में ग्राम कस्बा फतेहपुर में शब्बेदारी का आयोजन किया गया, जहां पर कर्बला की शहादत को याद करके गम का इजहार किया।
मजलिस को संबोधित करते हुए मौलाना सैयद फरमान हैदर ने हजरत अली अकबर (अ.स.) की शहादत का जिक्र करते हुए कहा कि वे युवाओं के लिए आदर्श हैं। उन्होंने कम उम्र में ही बहादुरी, ईमानदारी और अपने इमाम के प्रति वफादारी का सर्वोच्च उदाहरण पेश किया।
मजलिस के बाद अंजुमन अब्बासिया मिजवां अंजुमन रौनक इस्लाम जलालपुर, अंजुमन दरबारे हुसैनी लेडूवावर, अंजुमन हुसैनिया पुरंदरपुर, अंजुमन इमामिया बिलहरी इमाम अली ने नौहा मातम किया।