UP News: पुलिस हिरासत में गोली मारने के मामले में 22 साल बाद आया फैसला, तत्कालीन थानाध्यक्ष को उम्रकैद
Azamgarh News: आजमगढ़ जिले में हिरासत में गोली मारने के मामले में 22 साल बाद फैसला आया। कोर्ट में जिरह के दौरान तत्कालीन थानाध्यक्ष के दोषी करार होने पर उम्रकैद हुई। वहीं दूसरे आरोपी की मौत हो चुकी है।
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आजमगढ़ जिले में हिरासत में गोली मारने के मामले में कोर्ट ने तत्कालीन थानाध्यक्ष रानी की सराय जेके सिंह को दोषी करार दिया है। 22 साल तक चले मुकदमे की सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने तत्कालीन थानाध्यक्ष जेके सिंह ने एक लाख जुर्माना और आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। जबकि दूसरे आरोपी हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की पहले ही मौत हो चुकी है। यह फैसला जिला एवं सत्र न्यायालय जय प्रकाश पांडेय की कोर्ट ने बुधवार को सुनाया।
क्या है मामला
रानी की सराय थाने की पुलिस ने 29 मार्च 2003 को एफसीआई के कर्मचारी हरिलाल यादव को बैटरी चोरी के आरोप में गिरफ्तार कर हवालात में बंद कर दिया। हवालात में ही गोली लगने से उसकी मौत हो गई। कस्टडी में मौत के मामले में रानी की सराय थाने की पुलिस ने हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह पर प्राथमिकी दर्ज की।
वहीं मृतक हरिलाल यादव के पुत्र जितेंद्र ने नगर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि जब वह रात को खाना लेकर रानी की सराय थाने पहुंचे तो थाना प्रभारी जेके सिंह के ललकारने पर हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह ने उनके पिता हरिलाल यादव को गोली मारी थी। जिससे उनकी मृत्यु हो गई।
मामला रानी की सराय थाने का होने के कारण विवेचना कोतवाली से रानी की सराय थाने को स्थानांरित हो गई। छह माह बाद 2003 में ही इस मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी गई। जांच में फरवरी 2005 में सीबीसीआईडी ने इसकी चार्जशीट न्यायालय में दाखिल की। मुकदमे की सुनवाई के दौरान 2017 में हेड कांस्टेबल नरेंद्र बहादुर सिंह की भी मौत हो गई। लगभग 22 साल तक न्यायालय में मामले की सुनवाई चलती रही।
सुनवाई पूरी होने के बाद बुधवार को जिला एवं सत्र न्यायालय जय प्रकाश पांडेय ने आरोपी तत्कालीन थाना प्रभारी जेके सिंह को दोषी करार देते हुए एक लाख रुपये अर्थदंड और आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही गाली देने के मामले में दर्ज 504 के मुकदमे में कोर्ट ने एक साल की सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया।
