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नेपाली शिक्षक की नियुक्ति का मामला: प्रबंधन बोला, भारत मैत्री संधि के तहत मदरसे में हुई थी शिक्षक की तैनाती

अमर उजाला नेटवर्क, आजमगढ़। Published by: वाराणसी ब्यूरो Updated Thu, 19 Feb 2026 11:08 AM IST
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सार

Azamgarh News: आजमगढ़ जिले में नेपाली शिक्षक की नियुक्ति के मामले में जांच के बाद प्रबंधन ने जवाब में कहा कि भारत मैत्री संधि के तहत मदरसे में नेपाली शिक्षक की तैनाती हुई थी। 

Nepali teacher appointment matter management cited India Friendship Treaty in Azamgarh
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार

आजमगढ़ जिले के मुबारकपुर स्थित दारूल उलूम अहले सुन्नत मदरसा अशरफिया मिस्बाहुल उलूम में एक नेपाली शिक्षक की नियुक्ति पर विवाद खड़ा हो गया है। शिकायत मिलने के बाद डीएम के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने जांच शुरू करते हुए प्रबंधन को नोटिस भेजा था। नोटिस में प्रबंधन ने शिक्षक को नेपाली माना है। साथ ही कहा कि भारत मैत्री संधि के तहत इस शिक्षक की तैनाती हुई है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने प्रबंधन की रिपोर्ट को सही मानते हुए डीएम को भेज दी है। जबकि प्रबंधन की कहानी में कई झोल है। 
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क्या है पूरा मामला
मुबारकपुर निवासी मुहम्मद अरबी ने 16 जनवरी को जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर आरोप लगाया था कि मदरसे में वर्ष 2016 में मौलवी मुफ्ती मोहम्मद रजा की नियुक्ति नियम विरुद्ध तरीके से की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि शिक्षक मूल रूप से नेपाल के निवासी हैं और उनकी विदेशी नागरिकता की जानकारी छिपाकर नियुक्ति की गई। इससे उन्हें सरकारी लाभ भी दिलाया जा रहा है। 
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जिलाधिकारी के निर्देश पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी वर्षा अग्रवाल ने जांच शुरू की। प्रबंध समिति को नोटिस जारी कर संबंधित शिक्षक के अभिलेख तलब किए गए। प्रबंधन ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को 31 जनवरी को ही अभिलेख और स्पष्टीकरण दे दिया।

2016 में हुई थी शिक्षक की नियुक्ति

स्पष्टीकरण में प्रबंधन ने बताया कि मोहम्मद रजा की वर्ष 2016 में नियुक्ति की गई थी तथा वे जिला धनुसा नेपाल के हैं। पूर्व में वह जामिया हजरत निजामुद्दीन औलिया जाकिर नगर नई दिल्ली में 23 अक्तूबर, 2009 से अगस्त 2014 तक पठन-पाठन कर चुके हैं। नई दिल्ली में उनका स्थायी पता उनके आधार कार्ड के मुताबिक न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी साउथ दिल्ली है। वर्तमान में वह मदरसे में शिक्षण कार्य कर रहे हैं। उनका स्थायी पता पुरानी बस्ती मुबारकपुर है। 

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यह भी बताया गया कि मोहम्मद रजा के अवैध तरीके से हिंदुस्तान का नागरिक होने की शिकायत गलत है, क्योंकि इस संबंध में कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया है। जहां तक रोजगार का प्रश्न है तो भारत-नेपाल समझौता अमन व दोस्ती 1950 के तहत कोई भी नेपाली बिना वीजा के काम कर सकता है। जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने इस रिपोर्ट को डीएम के पास भेज दिया है।

कई सवालों के अब भी जवाब नहीं 

  • क्या जांच में मदरसे में नियुक्त नेपाली शिक्षक की नागरिकता की जांच की गई?
  • अगर की गई तो उसका जिक्र जांच रिपोर्ट में क्यों नहीं किया गया?
  • नियम के तहत क्या भारत सरकार से इसकी अनुमति ली गई?
  • अगर ली गई तो उसका प्रमाण पत्र कहां है?
 
क्या कहते हैं अधिकारी
शिकायत के बाद डीएम के निर्देश पर हमने जांच करने के लिए प्रबंधन से शिक्षक के अभिलेख और स्पष्टीकरण मांगे थे। उनका स्पष्टीकरण आ गया है। जांच कर रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है। -वर्षा अग्रवाल, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

ऐसे ही एक मामले में हाईकोर्ट निरस्त कर चुका है अनुकंपा नौकरी

साल 2017 में हाईकोर्ट में राजकुमारी बनाम उप्र की एक याचिका दाखिल हुई थी। इसमें शिकायतकर्ता ने कहा था कि राजकुमारी नेपाली नागरिक हैं, इसलिए वह अनुकंपा नौकरी की हकदार नहीं है। वहीं राजकुमारी का तर्क था कि उन्होंने योगेंद्र प्रसाद चौधरी से शादी की थी। वह सरकारी सेवा में थे और 21 फरवरी 2013 को उनकी मृत्यु हो गई। इस कारण अब उनको अनुकंपा नौकरी मिलनी चाहिए। 17 जनवरी 2017 को याचिका को खारिज करते हुए कोर्ट ने कहा कि इस प्रकार सरकारी सेवा केवल उन व्यक्तियों तक ही सीमित है जो भारत के प्राकृतिक नागरिक हैं या जिन्होंने भारतीय नागरिकता प्राप्त कर ली है। जो व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं है, वह केंद्र या राज्य सरकार में नियमित या स्थायी नौकरी नहीं कर सकता। याचिकाकर्ता ने ऐसा कुछ भी नहीं दिखाया है जो उसे किसी भारतीय नागरिक से विवाह करने मात्र से विदेशी होने के बावजूद राज्य सरकार के किसी भी विभाग में नियुक्ति का दावा करने का अधिकार देता हो।
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