फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Azamgarh News ›   The tantrum of the Sarayu swallowed more than 12 villages and thousands of acres of fertile land into the river in 40 years

Azamgarh News: सरयू के तांडव ने 40 साल में निगले 12 से ज्यादा गांव, हजारों एकड़ उपजाऊ जमीन नदी में समाई

Sat, 01 Aug 2026 12:14 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 01 Aug 2026 12:14 AM IST
विज्ञापन
The tantrum of the Sarayu swallowed more than 12 villages and thousands of acres of fertile land into the river in 40 years
सगड़ी तहसील के सहबदिया में कटान करती सरयू। संवाद
लाटघाट। सगड़ी तहसील के उत्तरी क्षेत्र से होकर बहने वाली सरयू नदी का रौद्र रूप पिछले 40 साल से लगातार तबाही मचा रहा है। नदी की तेज कटान अब तक लगभग 12 से ज्यादा गांवों और उनके पुरवों का अस्तित्व समाप्त कर चुकी है। हजारों एकड़ उपजाऊ कृषि भूमि नदी की धारा में समा गई है, जबकि सैकड़ों परिवारों को अपना पुश्तैनी घर-बार छोड़कर दूसरे स्थानों पर नई बस्तियां बसाने के लिए मजबूर होना पड़ा। कटान का यह सिलसिला आज भी जारी है और तटवर्ती गांवों के लोग हर साल बाढ़ और कटान के भय के बीच जीवन बिताने को विवश हैं।
विज्ञापन

सगड़ी क्षेत्र में साल 1980 के दशक से कटान ने विकराल रूप धारण किया। हालांकि साल 1935-40 के दौरान भी सरयू ने व्यापक तबाही मचाई थी। चक्की गांव निवासी पलटन यादव बताते हैं कि उस समय पूरा गांव करीब चार किलोमीटर दूर जाकर दोबारा बसाया गया था, लेकिन बाद में वहां भी नदी का कटाव शुरू हो गया। अचलनगर, गरीब दुबे, भिक्षुक दास और अचल सिंह के पुरवों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि भी विकराल धारा में समा गई। साल 1989-90 में हैदराबाद गांव की लगभग 100 घरों वाली मूल बस्ती कटान की भेंट चढ़ गई। ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर दूर नया गांव बसाना पड़ा। गांव के एकादशी पटेल, रामप्यारे, रामजनक और महेंद्र बताते हैं कि कटान इतनी तेज थी कि लोगों को अपना सामान तक समेटने का समय नहीं मिला। इसके अगले वर्ष 1990-91 में रोशनगंज गांव भी नदी में समा गया, जहां करीब 250 परिवार विस्थापित होकर पांच किलोमीटर दूर बसने को मजबूर हुए।
विज्ञापन

देवारा खास राजा के कई पुरवें भी समाए
देवारा खास राजा के कई मजरे भी पिछले सालों में नदी में विलीन हो चुके हैं। साल 2013 से 2016 के बीच रमई का पुरवा, पतिराज का पुरवा, मुशई का पुरवा, भीमली का पुरवा, मुरली का पुरवा, त्रिलोकी का पुरवा, झगरहवा और बगहवा सहित कई बस्तियां घाघरा में समा गईं। वहीं, साल 2004-05 में हाजीपुर, धुसवा और ठिकहिया गांव भी कटान से प्रभावित हुए, जहां दर्जनों परिवारों को बांध के दक्षिण नए स्थान पर बसना पड़ा।
विज्ञापन
विज्ञापन

नहीं रुकी कटान तो इतिहास बन जाएगा सहबदिया
वर्तमान समय में भी देवारा खास राजा, सहबदिया और परसिया गांवों के सामने घाघरा की कटान लगातार जारी है। ग्रामीणों का कहना है कि हर मानसून में घर, खेत और भविष्य खोने का डर बना रहता है। उनका आरोप है कि स्थायी कटानरोधी उपायों के अभाव में हर वर्ष तबाही दोहराई जाती है। ग्रामीणों ने प्रशासन से प्रभावी तट सुरक्षा कार्य, पिचिंग और कटानरोधी परियोजनाओं को शीघ्र लागू करने की मांग की है, ताकि आने वाले समय में और गांव नदी में समाने से बच सके।

घाघरा का जलस्तर लगातार तीसरे दिन घटा, तटवर्ती गांवों को मिली राहत
देवारा क्षेत्र में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार तीसरे दिन घटने से तटवर्ती गांवों के लोगों ने राहत की सांस ली है। बदरहुआ नाले पर बृहस्पतिवार शाम चार बजे जलस्तर 70.70 मीटर दर्ज किया गया था, जो शुक्रवार को 25 सेंटीमीटर घटकर 70.45 मीटर पर पहुंच गया। वहीं डिघिया नाले पर जलस्तर 69.94 मीटर से 23 सेंटीमीटर घटकर 69.71 मीटर दर्ज किया गया। डिघिया नाले का खतरा बिंदु 70.40 मीटर और बदरहुआ नाले का खतरा बिंदु 71.68 मीटर है। प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed