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Baghpat News: बागपत में बनेगी एशिया की सबसे बड़ी बीएसएल-3 प्रयोगशाला
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बागपत। चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान बागपत में एशिया की सबसे बड़ी बीएसएल-3 (जैव सुरक्षा स्तर-3) प्रयोगशाला बनेगी। 160 करोड़ रुपये की लागत से बन रही यह प्रयोगशाला अटलांटा के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र की तरह होगी। इसका अगले साल तक कार्य पूरा होगा। यहां पशु-पक्षियों में होने वाली 42 बीमारियों की वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच होगी।
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान में अभी तक पुशओं की बीमारी खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू और मुर्गियों की बीमारी रानीखेत की वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच होती है। पशुओं में बढ़ रही बीमारियों के कारण वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच जल्दी हो सके, इसके लिए ही भारत सरकार ने संस्थान को चुना है। यहां वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच शुरू होने पर अपने देश के साथ ही अन्य देशों को फायदा मिल सकता है।
-यह होती है बीएसएल-3 प्रयोगशाला
प्रयोगशाला में जांच करते हुए ऐसे जीवाणु व पदार्थों के साथ कार्य किया जाता है, जो सांस के साथ शरीर में जाकर घातक प्रभाव डालते हैं। इस लैब में वह सभी सुविधाएं होती हैं, जो इससे बचाव करती हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उपकरण इस तरह से होते हैं, जिससे जीवाणु बाहर नहीं आ सके। यहां से निकलने वाली हवा तक को फिल्टर किया जाता है। इससे निचले स्तर की प्रयोगशालाओं में यह सुविधाएं नहीं होती है।
-इनकी जांच हो सकेगी
एवियन इन्फेक्शियस ब्रोंकाइटिस, एवियन स्पाइरोकीटोसिस, ब्लैक क्वार्टर, ब्रूसेला एबॉर्टस, कैनाइल एडेनोवायरस, कैनाइल कोरोनावायरस, कैनाइल लेप्टोस्पयरोसिस, कैनाइल पार्वोवायरस, क्लासिकल स्वाइन फीवर, डक पाश्वुरेला, डक प्लेग, एग ड्रॉप सिंड्रोम, फाउल कॉलरा, इन्क्लूजन बॉडी हेपेटाइटिस, इन्फेक्शियस चिकन एनीमिया, मेरेक रोग, रानीखेत, रियो वायरस, टेटनेस, थीलेरियोसिस, साल्मोनेला आदि 42 वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच होगी।
-16 साल बाद बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। अब 16 साल बाद संस्थान में नई प्रयोगशाला बनने पर पशुपालकों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। पशु-पक्षियों की बीमारियों की रोकथाम के लिए वैक्सीन आने का इंतजार काफी कम हो सकता है।
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संस्थान में बीएसएल-3 प्रयोगशाला बन रही है। इसके बनने पर वैक्सीन की गुणवत्ता की बेहतर जांच होगी। पशु-पक्षियों में होने वाली 42 बीमारियों की वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच यहां होगी। इसका बड़ा फायदा पूरे देश को मिलेगा। -डॉ. नवीना बी. महेश्वरप्पा, निदेशक, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान
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चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान में अभी तक पुशओं की बीमारी खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू और मुर्गियों की बीमारी रानीखेत की वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच होती है। पशुओं में बढ़ रही बीमारियों के कारण वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच जल्दी हो सके, इसके लिए ही भारत सरकार ने संस्थान को चुना है। यहां वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच शुरू होने पर अपने देश के साथ ही अन्य देशों को फायदा मिल सकता है।
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-यह होती है बीएसएल-3 प्रयोगशाला
प्रयोगशाला में जांच करते हुए ऐसे जीवाणु व पदार्थों के साथ कार्य किया जाता है, जो सांस के साथ शरीर में जाकर घातक प्रभाव डालते हैं। इस लैब में वह सभी सुविधाएं होती हैं, जो इससे बचाव करती हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। उपकरण इस तरह से होते हैं, जिससे जीवाणु बाहर नहीं आ सके। यहां से निकलने वाली हवा तक को फिल्टर किया जाता है। इससे निचले स्तर की प्रयोगशालाओं में यह सुविधाएं नहीं होती है।
-इनकी जांच हो सकेगी
एवियन इन्फेक्शियस ब्रोंकाइटिस, एवियन स्पाइरोकीटोसिस, ब्लैक क्वार्टर, ब्रूसेला एबॉर्टस, कैनाइल एडेनोवायरस, कैनाइल कोरोनावायरस, कैनाइल लेप्टोस्पयरोसिस, कैनाइल पार्वोवायरस, क्लासिकल स्वाइन फीवर, डक पाश्वुरेला, डक प्लेग, एग ड्रॉप सिंड्रोम, फाउल कॉलरा, इन्क्लूजन बॉडी हेपेटाइटिस, इन्फेक्शियस चिकन एनीमिया, मेरेक रोग, रानीखेत, रियो वायरस, टेटनेस, थीलेरियोसिस, साल्मोनेला आदि 42 वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच होगी।
-16 साल बाद बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद
चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान की शुरुआत वर्ष 2010 में हुई थी। अब 16 साल बाद संस्थान में नई प्रयोगशाला बनने पर पशुपालकों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। पशु-पक्षियों की बीमारियों की रोकथाम के लिए वैक्सीन आने का इंतजार काफी कम हो सकता है।
संस्थान में बीएसएल-3 प्रयोगशाला बन रही है। इसके बनने पर वैक्सीन की गुणवत्ता की बेहतर जांच होगी। पशु-पक्षियों में होने वाली 42 बीमारियों की वैक्सीन की गुणवत्ता की जांच यहां होगी। इसका बड़ा फायदा पूरे देश को मिलेगा। -डॉ. नवीना बी. महेश्वरप्पा, निदेशक, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय पशु स्वास्थ्य संस्थान
